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समय पर इलाज नहीं:मरीजों को रेमडेसिविर पहुंचाने की सरकारी व्यवस्था फेल, 6 की जरूरत, पहले डोज के बाद इंजेक्शन नहीं

हाेशंगाबाद इटारसी2 दिन पहले
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  • इटारसी में इंजेक्शन के अभाव में एक की माैत, इंजेक्शन लेने के लिए देने पड़ रहे ज्यादा रुपए
  • रेमडेसिविर की मारामारी, मरीज के परिजन परेशान

शासन द्वारा काेराेना मरीजाें की जान बचाने के लिए पाॅजिटिव मरीजाें काे पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन उपलब्ध करवाने के वादे झूठे साबित हाे रहे हैं। मरीजाें काे रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए परेशान हाेना पड़ रहा है। किसी काे पहला डाेज मिल रहा है ताे इसके बाद अन्य 5 डाेज नहीं मिल रहेें हैं या 2 डाेज पूरे मिल रहे हैं इसके बाद 6 इंजेक्शन काे काेर्स पूरा करने में परेशानी हाे रही है। रेमडेसिविर इंजेक्शन का पहले डाेज में दाे इंजेक्शन लगाए जाते है। बचे 4 डाेज काे प्रतिदिन लगातार लगाया जाना आवश्यक माना जाता है, लेकिन मरीजाें काे रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिल पाने के कारण काेर्स पूरा और लगातार नहीं हाे पा रहा है। इससे मरीज और परिजन परेशान है।

इंजेक्शन देने के लिए बनाई 3 डाॅक्टराें की टीम
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने के लिए मरीजाें का चयन करने के लिए के लिए तीन डाॅक्टराें की चयन समिति बनाई है। डाॅक्टराें के चयन के बाद उपलब्धता के अनुसार इंजेक्शन मरीज काे लगाने के लिए भेजा जाता है।

रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए ये पात्रता

  • मरीज का स्टेट्स काेविड पाॅजिटिव हाेना चाहिए।
  • मरीज का सेच्युरेशन 90 से नीचे हाेना चाहिए।
  • मरीज काे लगातार 3 दिनाें से तेज बुखार हाे।
  • सेच्युरेशन 26 से ज्यादा हाे।
  • मरीज ज्यादा गंभीर हाे।

इंजेक्शन नहीं मिलने के ये कारण

  • शासन से इंजेक्शन की खेप एक दाे दिनाें के अंतराल में आ रही है।
  • जाे खेप जिले में पहुंचाई जा रही है, उसमें कभी 10 कभी 20-30 इंजेक्शन भेजे जा रहे हैं।

अस्पताल में भर्ती है मरीज, इंजेक्शन का इंतजार

1. नर्मदा अपना अस्पताल में भर्ती इटारसी निवासी नेहा खरे (32) भर्ती हैं। उनका सीटी स्काेर 14/25 है, सांस लेने में तकलीफ और चक्कर आ रहे हैं। उन्हें अभी तक एक भी रेमडेसिविर डाेज नहीं लगा है। उन्हाेंने बताया कि इंजेक्शन की व्यवस्था के लिए परिवार के सदस्य परेशान हाे रहे हैं।

2. नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर रसूलिया निवासी युवक ने बताया कि उनका भाई पांडे नर्सिंग हाेम में आईसीयू में भर्ती है। रविवार काे एक डाेज मिला था, लेकिन दूसरा डाेज नहीं मिला है। मुझे शाम तक डाेज आने की संभावना है, उन्हें इंजेक्शन का इंतजार है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद मिलता है इंजेक्शन
^अस्पताल से मरीजाें के नाम की डिमांड आती है। जिसे स्वास्थ्य विभाग की टीम जांचती है। इंजेक्शन की जैसी भी मात्रा हमारे पास उपलब्ध हाेती है। उस आधार पर अस्पतालाें में वितरण की जाती है।
-शैलेंद्र बडाेनिया, तहसीलदार हाेशंगाबाद

फैक्ट फाइल

जिले में अब तक कुल 1700 इंजेक्शन ही आए हैं। सबसे ज्यादा रेमडेसिविर इंजेक्शन 18 अप्रैल काे 384 बायल आए थे।

इटारसी में भी रेमडेसिविर को लेकर ऐसे ही हालात; यहां महंगी कीमत चुकाकर खरीदे रेमडेसिविर इंजेक्शन, दूसरे मरीज की जान दो डोज भी नहीं बचा पाए

केस -1; इटारसी की वीआईपी कॉलोनी में रहने वाले बीएसएनएल से रिटायर्ड कर्मी भोपाल के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। कोविड के लक्षण दिखने के बाद उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा था। यहां कोई ऑक्सीजन बेड खाली नहीं होने पर परिजन भोपाल ले गए। वहां डॉक्टर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन लाने को कहा। उनके भाई श्रवण लौवंशी ने बताया कि पहले दो डोज बड़ी मुश्किल में ब्लैक में मिले। इसके लिए महंगी कीमत चुकानी पड़ी। बाद में किसी तरह चार डोज का इंतजाम और किया, तब जाकर उनके भाई की हालत खतरे से बाहर आई।

केस -2; दूसरा मामला कावेरी स्टेट में रहने वाले कृषि उपज मंडी के एएसआई का है। कोविड की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी। उनको रेमडेसिविर के दो ही मिले, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। घर में पत्नी के अलावा कोई और परिजन नहीं था। मंडी के सहकर्मी बताते हैं कि इतना समय नहीं मिला कि सीटी स्कैन करवा पाते। ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्हें एक निजी अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती किया। दो दिन में माैत हो गई। यदि सुविधा मिल जाती तो जान बच सकती थी।

प्रशासन देता है रेमडेसिविर
^रेमडेसिविर इंजेक्शन वितरण के लिए तीन डाॅक्टराें की टीम है। मैं स्वयं शामिल हूं। ऐसे मरीज काे पहले प्राथमिकता देते हैं जाे गंभीर है। सेच्युरेशन 90 से कम, तेज बुखार हाे। जिला अस्पताल मंे ड्यूटी डाॅक्टर नाम देते हैं। इसके बाद लाॅट आने के बाद स्वीकृति दी जाती है। निजी अस्पताल काे इंजेक्शन जिला प्रशासन देता है।
-डाॅ. दिनेश दहलवार, सिविल सर्जन हाेशंगाबाद

गंभीर मरीजों काे लगता है रेमडेसिविर इंजेक्शन
कोरोना के संक्रमण की दूसरी लहर में 50 साल तक के मरीज ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इसी कारण ऑक्सीजन वेंटिलेटर, प्लाज्मा और रेमडेसिविर जैसी एंटीवायरल दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। रेमडेसिविर के इंजेक्शन की शार्टेज है। मेडिकल स्टोर पर यह दवा नहीं है। लोग किसी भी कीमत पर रेमडेसिविर का इंजेक्शन खरीदने को तैयार हैं। इस कारण इसकी ब्लैक मार्केटिंग हो रही है।

वहीं दूसरी एंटी-वायरल दवा नहीं होने से रेमडेसिविर इंजेक्शन का नाम ज्यादा उछला है। इसका उपयोग सामान्य एंटीबायोटिक की तरह नहीं किया जाना चाहिए। शहर के डॉक्टर केएल जैसवानी कहते हैं कि जिन रोगियों के ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट हो रही है और एक्स-रे या सीटी-स्कैन में छाती में दिक्कतें पता चली हैं सिर्फ ऐसे रोगियों को ही इसे दिया जा सकता है।

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