आपदा, अवसर और आत्मनिर्भर नारी की कहानी:कोरोनाकाल में पति को आया हार्ट अटैक, ताई ने संभाली घर की कमान

इटारसी9 महीने पहले
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मनाेरमा अग्रवाल। - Dainik Bhaskar
मनाेरमा अग्रवाल।
  • हुनर का इस्तेमाल: अचार, पापड़, साफ्ट टाॅय, ताेरण अाैर साज सज्जा का सामान बना लोगों की पसंद, अब ऑनलाइन हो रही बिक्री

मेरा नाम मनाेरमा अग्रवाल है, पर इस नाम से इन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। लाेग अपने काम के लिए ताई कहकर बुलाते हैं। उम्र 62 साल है लेकिन जिम्मेदारियां बुजुर्ग नहीं हाेने देतीं। मेरा उत्साह तब और भी बढ़ जाता है जब मेरी बनाई कलात्मक वस्तुओं काे लेकर महिलाएं और युवतियां कहती हैं ताई आपके हाथाें में जादू है।

सब अच्छा चल रहा था। दाे बेटियाें की शादी की। 2003 में पति महेश अग्रवाल काे पैरालिसिस का अटैक आया। गल्ले की दुकान बेहतर चल रही थी। 2015 में दुकान बंद करना पड़ी। परिजनाें से आर्थिक सहयाेग घर चल रहा था। घर पर ही छुटपुट सिलाई के काम भी मिल जाते थे। काेराेना आया और लाॅकडाउन लगा ताे काम मिलना बंद बिल्कुल बंद हाे गया। काेराेना के समय सभी के काम बंद हाेने से परिजनाें से भी सहयाेग लेना संभव नहीं लग रहा था। ऐसे में परिवार का खर्च चलना मुश्किल हाे गया। दुकान भी बेचना पड़ी।

गल्ला व्यापारी के नाम से परिवार की पहचान है ताे राशन और भाेजन बांटने वाले भी घर तक नहीं पहुंच रहे थे। इस दाैरान पति महेश अग्रवाल काे फिर हार्ट अटैक आया। पड़ाेस में आई एक इंटरप्राेन्याेर काे अपनी समस्या भी बताई ताे वह बाेली कि पापड़ से इनकम हाेगी। तब मैंने उन्हें अपनी बनाई हुई खाने और घर सजाने के सभी सामान दिखाए।

उन्हाेंने कहा हुनर है ताे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं। आप अपने हुनर का उपयाेग कीजिए, फिर साेशल मीडिया पर आईडी बनवाई। लगातार ऑर्डर मिलने लगे। अचार, पापड़, साफ्ट टाॅय, ताेरण और साज सज्जा के सामान बनवाने के लिए शहर ही नहीं आसपास के क्षेत्राें से भी ऑर्डर आ रहे हैं। परिवार की आर्थिक गाड़ी अब पटरी पर आ रही है।

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