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महंगा आशियाना:लाेहा, ईंट, रेत महंगी; 1 हजार वर्गफीट के मकान की 61 हजार रुपए तक बढ़ी लागत

हाेशंगाबादएक महीने पहले
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  • लाेहा 1800 रुपए क्विंटल, ईंट 1 रुपए, रेत 10 रुपए वर्गफीट तक महंगी हुई
  • यह कारण- छत्तीसगढ़ में लोहे की खदानों में रॉ मटेरियल की शॉटेज

कच्चा लाेहा, ईंट और रेत महंगी हाेने से सपनाें का घर बनना महंगा हाे गया है। पिछले दाे माह में दीपावली के बाद से लाेहे के दाम निरंतर बढ़ रहे हैं। दीपावली से पहले 3700 रुपए क्विंटल में बिकने वाला लाेहा अब 5500 रुपए क्विंटल है। यानी लाेहा 1800 रुपए क्विंटल महंगा हाे गया है। लाेहा, ईंट और रेत महंगी हाेने से 1 हजार वर्गफीट के प्लॉट में मकान बनाने में करीब 61 हजार रुपए अतिरिक्त लग रहे हैं।

लाेहे, रेत और ईंट के दाम बढ़ने से निजी के साथ सरकारी निर्माण कार्याें में लगे ठेकेदाराें सहित काॅलाेनाइजराें काे भी नुकसान हाे रहा है। रेरा के नियमानुसार निर्माण की लागत अनुबंध के मुताबिक ही रहेगी। निर्माण के दाैरान सामग्री या लागत बढ़ने से भवन की तय कीमत काे नहीं बढ़ाया जा सकेगा। यह नुकसान काॅलाेनाइजर काे ही वहन करना पड़ेगा।

कमी : राॅ मटेरियल के अभाव में बढ़ रहे दाम
लाेहा व्यवसायी हुनैद अंसारी ने बताया कई सालाें में यह पहला माैका है जब लाेहे के दाम 5500 रुपए क्विंटल पहुंचे हैं। 2007-8 में लाेहा के दाम 4700 रुपए क्विंटल पर पहुंचे थे। अब राॅ मटेरियल के अभाव में लाेहा महंगा हुआ है। लाेहे की मीलें छत्तीसगढ़ के रायपुर में हैं। यूनियन की माेनाेपाली के तहत कच्चे लाेहे के अभाव में दाम बढ़े हैं। 10 और 12 एमएम का लाेहा 5500 रुपए क्विंटल और 8 एमएम का 5600 रुपए क्विंटल है।

मुश्किल : गुणवत्ता और समय पर काम भी जरूरी
शासकीय काॅन्ट्रैक्टर देवेंद्र वर्मा ने बताया लाेहा, रेत, ईंट के दाम बढ़े हैं। लाेहे में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। चूंकि अनुबंध पुराने दर से है, इसलिए समय पर काम पूरा करना जरूरी है। इसका भार ठेकेदार के ऊपर ही रहेगा। सरकारी निर्माणाें में गुणवत्ता का ध्यान रखना जरूरी हाेता है। शासकीय ठेकेदार फैजान-उल-हक ने बताया लाेहा महंगा हुआ है। समय सीमा में काम पूरा करना जरूरी है इसलिए ठेकेदार काे ही नुकसान उठाना पड़ेगा।

नफा-नुकसान : घाटा काॅलाेनाइजराें काे ही
काॅलाेनाइजर आनंद पारे ने बताया लाेहे के दाम बढ़ने से काॅलाेनियाें के निर्माण महंगे हुए हैं। भवन निर्माण की अन्य सामग्री भी महंगी हाे रही है। साथ ही रेत के दाम पहले 20 रुपए घन फीट थे जाे कि अब 35 घन फीट तक पहुंचने के आसार बन रहे हैं। सीमेंट के दाम अब तक लंबे समय से स्थिर हैं। हालांकि दाम बढ़ने का नुकसान खरीददार काे नहीं हाेगा। रेरा के नियमानुसार यह नुकसान बिल्डर्स या काॅलाेनाइजर काे ही उठाना हाेगा।

परेशानी : पीएम आवास की भी बढ़ जाएगी लागत
लाेहे के दाम बढ़ने का असर पीएम आवास का निर्माण कराने वाले गरीब परिवाराें पर भी पड़ेगा। शहर में 320 वर्ग फीट भूमि पर निर्माण के लिए 2 लाख 50 हजार रुपए हितग्राही काे दिए जा रहे हैं। वहीं ग्राम पंचायत क्षेत्र में यह राशि 1 लाख 50 हजार रुपए है। प्रति क्विंटल लाेहे के दाम 1700 रुपए ईंट प्रति हजार पर एक हजार रुपए बढ़ने और रेत के दमा बढ़ने का असर पीएम आवास निर्माण करा रहे हितग्राहियाें काे भी हाेगा।

ऐसे समझें महंगाई: एक हजार ‌वर्गफीट का मकान बनाने में इतने ज्यादा रुपए लगेंगे
लाेहा : 20 क्विंटल
अब : 5500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 1.10 लाख रुपए
यानी 36,000 रुपए ज्यादा

ईंट : 10 हजार
पहले : 4 रुपए प्रति ईंटा के हिसाब से कीमत 40 हजार रुपए
अब : 5 रुपए प्रति ईंटा के हिसाब से 50 हजार रुपए
यानी 10,000 रुपए ज्यादा

रेत : 1500 वर्गफीट

पहले : 20 रुपए प्रति वर्गफीट के हिसाब से कीमत 30 हजार रुपए अब : 30 रुपए प्रति वर्गफीट के हिसाब से 4 हजार 500 रुपए यानी 15000 रुपए ज्यादा

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