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आत्मनिर्भर महिलाएं:कोरोना में 3 करोड़ का नुकसान, अब डेढ़ लाख मुनाफा, ​​​​​​​सुखतवा चिकन का नाम से बनाई पहचान, समिति की सदस्याएं कर रहीं मुर्गीपालन

हाेशंगाबाद2 महीने पहले
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सुखतवा चिकन का नाम से प्रसिद्ध केसला पोल्ट्री सहकारी सोसायटी मर्यादित सुखतवा कोरोना में मिले घाटे से उबरकर अब मुनाफे में है। समिति का बीसवां वार्षिक अधिवेशन मंगलवार को सुखतवा में हुआ। आदिवासी महिलाओं की समिति ने स्वयं के चूजे बनाने की फैक्ट्री जमानी में स्थापित की है। कंपनी में विदेशी बैंक से ऋण लेकर कीरतपुर औद्योगिक क्षेत्र में मुर्गी दाना फैक्ट्री स्थापित किया है। समिति को कोरोनाकाल में 3 करोड़ का नुकसान हुआ। समिति की महिलाओं ने मुर्गीपालन से इस साल डेढ़ लाख का मुनाफा कमाया है।

मुर्गीपालन से आदिवासी महिलाओं ने इस वर्ष 34 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। समारोह के दौरान साल भर अच्छा उत्पादन करने वाले मुर्गीपालकों को सम्मानित किया गया। समिति की अध्यक्ष कुंतीबाई ने समारोह में 20-21 का आय-व्यय का लेखाजोखा प्रस्तुत किया। सोसाइटी के मुख्य कार्यकारी प्रबंधक डॉ. हरे कृष्ण डेका ने बताया कुंती धुर्वे और समस्त महिला सदस्य, जमानी हेजरी प्रबंधक राजेश पाल का विशेष सहयोग रहा। डॉ गजेंद्र यादव ने आभार प्रदर्शन किया।

खुद चूजे पालती हैं समिति, 10 महिलाओं से शुरू किया था काम

सुखतवा चिकन के नाम से प्रदेश भर में प्रसिद्ध यहां की मुर्गियां देश के कई राज्यों में इसकी सप्लाई होती है। सहकारी समिति की मुख्य संस्था मप्र वुमेन पोल्ट्री प्रोड्यूसर्स कंपनी है। इसने स्वयं के चूजे को पालने की फैक्ट्री जमानी में स्थापित की है। कंपनी में विदेशी बैंक से ऋण लेकर कीरतपुर औद्योगिक क्षेत्र में मुर्गी दाना फैक्ट्री स्थापित किया है।

अध्यक्ष कुंती धुर्वे ने बताया 10 महिलाओं को साथ लेकर शुरू की गई समिति में आज करीब 1250 महिलाएं हैं। कोरोना वायरस के कारण पिछले वर्ष में सोसाइटी को लगभग तीन करोड़ 40 लाख 58 हजार 972 रुपए का नुकसान भुगतना पड़ा। महिला सदस्यों ने मेहनत कर एक साल में लगभग डेढ़ कराेड़ का मुनाफा हासिल किया है। इस वर्ष लगभग 25 लाख चूजे डालने की योजना है।

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