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टीबी के संक्रमण का कोरोना:काेराेना संक्रमण में सर्दी-खांसी से फेफड़े कमजोर, पांच महीने में टीबी के 775 केस, 9 लोगों की मौत

होशंगाबादएक महीने पहलेलेखक: सुमित शर्मा
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  • डायबिटीज और कैंसर के मरीजों में 10 गुना रहता है खतरा

कोरोना संक्रमित होने के बाद लोगों में टीबी (क्षय) और टीबी के लक्षण भी मिले। कोरोना से संक्रमित लोगों के फेफड़े कोरोना के कारण कमजोर हुए और लंबे समय तक उन्हें खांसी रहने के कारण टीबी का रोग बन गया। हालांकि जिला क्षय रोग विभाग ने सभी कोरोना मरीजों पर अध्ययन नहीं किया है, लेकिन कोरोना के बाद मरीज में टीबी के लक्षण मिलने पर जांच करवाई तो उन्हें टीबी पॉजिटिव निकली है।

जनवरी से मई महीने तक 775 लोगों में टीबी पॉजिटिव मिली है। जबकि मार्च तक 9 लोगों की मौत टीबी से हो चुकी है। विभाग के नोडल अधिकारी डॉ संजय पुरोहित ने बताया कि कोरोना के बाद टीबी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि भारत के 40 प्रतिशत आबादी में टीबी के कीटाणु होते हैं लेकिन यह कीटाणु टीबी की बीमारी उत्पन्न किए बिना ही सुप्त रहते हैं। किसी भी गंभीर बीमारी जैसे कोरोना, डायबिटीज, कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को होने के 10 गुना संभावना होती है।

कफ वाली खांसी बंद नहीं हुई
अशोक कुमार(32) को अप्रैल में कोरोना हुआ था। लेकिन ठीक होने के बाद भी कफ वाली खांसी बंद नहीं हुई। जिला अस्पताल के डॉ. संजय पुरोहित के पास जांच करवाई। उन्होंने ने टीबी की सम्भावना जताई। फिर टीबी की जांच की गई तो मुझे टीबी पॉजिटिव बताया गया। पिछले 15- 20 दिनों से टीबी की दवाई चल रही है। ऐसे ही सिवनीमालवा की चांदनी को भी कोरोना हुआ था, जांच में टीबी की पुष्टि हुई अब जिला क्षय अस्पताल से इलाज चल रहा है।

कोरोना से फेफड़ाें के निचले, टीबी में ऊपरी हिस्से होते हैं संक्रमित

कोरोना हो या टीबी यह दोनों ही बीमारी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है। डॉक्टर संजय पुरोहित ने बताया कि एक फेफड़े को तीन हिस्सों में देखा जाता है। अपर, मिडिल,लोअर कोरोना का संक्रमण फेफड़ों में निचले हिस्से यानी लोअर पोस्ट टीबी का संक्रमण आमतौर पर फेफड़ों के ऊपरी पोस्ट यानी अपर में होता है।

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