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बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था:3.18 लाख बच्चों पर एक विशेषज्ञ, एक ही एसएनसीयू, डॉक्टरों के 107 पद खाली

हाेशंगाबाद9 दिन पहले
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होशंगाबाद। जिला अस्पताल का पीआईसीयू वार्ड । - Dainik Bhaskar
होशंगाबाद। जिला अस्पताल का पीआईसीयू वार्ड ।
  • जिले में क्लास-1 और 2 डाॅक्टराें की कमी, चाइल्ड कोविड वार्ड भी नहीं

चिकित्सा विशेषज्ञ तीसरी लहर से बच्चों को खतरा बता रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग के पास न मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर है और न पर्याप्त डॉक्टर हैं। चाइल्ड कोविड वार्ड नहीं बनाए हैं। जिले में केवल एक ही एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट) है। अगर कोई नवजात बच्चा संक्रमित हुआ तो उसे भर्ती करने के लिए केवल जिला अस्पताल ही विकल्प है।

जिले के 3 लाख 18 हजार 376 बच्चे (नवजात से 12वीं तक) हैं। इन बच्चों के लिए इलाज के लिए जिले में केवल एक ही शिशु रोग विशेषज्ञ आरके चौधरी हैं, जो फिलहाल इटारसी सिविल अस्पताल के अधीक्षक हैं। जिले में किसी भी स्वास्थ्य केंद्र के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं।

जिला अस्पताल में केवल 5 शिशु चिकित्सक ही हैं। जिले में क्लास वन और क्लास टू कैटेगरी के डाॅक्टराें की भी कमी है। पूरे जिले में केवल 78 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें भी 10 डॉक्टर सालों से अनुपस्थित हैं। जिले में डॉक्टरों के 184 पद स्वीकृत हैं। केवल 78 पद भरे हैं। अभी भी डाॅक्टराें के 107 पद खाली हैं।

जिला अस्पताल में जिले का एक मात्र एसएनसीयू है। इसमें 18 बेड्स हैं,18 वार्मर, 03 सीपेप, 10 फाेटाे थैरेपी मशीन, 3 वेंटीलेटर हैं। 10 ऑक्सीजन कंसट्रेटर और ऑक्सीजन की सेंट्रल लाइन है। एसएनसीयू के पास 10 बेड्स की एनएचडीयू ( न्यूनेटल हाईडिपेंडेंसी यूनिट) तैयार की गई है।

अभी यह व्यवस्था: जिले स्वास्थ्य विभाग ने 16 बेड्स का शिशु वार्ड,10 बेड्स का पीआईसीयू (पीडियट्रिक इंटेसिंव केयर यूनिट),10 बेड्स का आईसीयू है। जिला पाेषण पुनर्वास केंद्र के उपर 20 बेड्स का एक वार्ड रिजर्व रखा है।

जिले में एक ही शिशु विशेषज्ञ है। डाॅक्टराें की कमी शासन काे बताई है। जाे डाॅक्टर लंबे समय से अनुपस्थित हैं उनकी सेवा समाप्ति के लिए पत्र लिख चुके हैं। तीसरी लहर के इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की जरूरत नहीं है। -डाॅ.दिनेश काैशल, सीएमएचआर

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