कोरोना के आगे सस्ती जान की कीमत:रिसोर्ट संचालक, इलेक्ट्राॅनिक्स विक्रेता, पापड़ सप्लायर और अनाज काराेबारी की मां की माैत... नहीं मिला किसी को बेड

होशंगाबाद6 महीने पहले
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सीटी स्कैन करवाया, ऑक्सीजन बुलवाई, महंगा बिल चुकाया फिर भी नहीं बचा पाए जान। - Dainik Bhaskar
सीटी स्कैन करवाया, ऑक्सीजन बुलवाई, महंगा बिल चुकाया फिर भी नहीं बचा पाए जान।

कोरोना का कर्फ्यू लगने के बाद 16 दिन से शहर में सन्नाटा है। इटारसी में लगातार माैतें बढ़ रही हैं। हर इलाके से बुखार से लेकर सांस लेने में दिक्कत आने के केस आ रहे हैं। अस्पतालाें में पलंग खाली नहीं है। ऑक्सीजन की भी कमी है। आपदा ऐसी है कि इलाज में दो से पांच लाख रुपए खर्च करने के बाद भी लाेग दम तोड़ रहे हैं।

गुरुवार काे इटारसी के प्लेटिनम रिसाेर्ट संचालक प्रमाेद प्रमोद बवेजा, इलेक्ट्राॅनिक्स सामान और सलाई मशीन विक्रेता रमाकांत सैनी (58), पापड़-मसालाें के सप्लायर अजीत जैन (49) और अनाज काराेबारी मां प्रेमलता ओसवाल (70) की माैत हाे गई। तमाम काेशिशाें के बाद भी परिजन इनकी जान नहीं बचा पाए, क्याेंकि अस्पतालाें में इन्हें पलंग नहीं मिले। इस कारण इलाज में कमी रह गई।
147 नए पाॅजिटिव,154 ठीक
हाेशंगाबाद। जिले में गुरूवार काे 147 लाेग काेराेना पाॅजिटिव आए हैं। होशंगाबाद 47, इटारसी 39, सिवनीमालवा 09, सोहागपुर 02,पिपरिया 07, बनखेड़ी 07, केसला 21, डोलरिया 04,बाबई 11 पाॅजिटिव मिले हैं। वहीं जिले में गुरूवार काे 154 मरीजाें काे काेविड सेंटराें व अस्पताल से डिसचार्ज किया है।

इनके अपनों ने हर कोशिश की, पर नहीं बचा पाए जिंदगी

केस 1 - भाेपाल में तीन अस्पताल बदले
प्रमोद बवेजा (58) इटारसी पंजाबी समाज के अध्यक्ष थे। उनकी कोई ट्रेवल्स हिस्ट्री नहीं थी। घर में ही बुखार आया। लंग्स में मामूली इंफेक्शन था। कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव थी। भोपाल में तीन अस्पताल बदले। सांस लेने में तकलीफ होने पर चेन्नई ले जाने की बात हुई किंतु वहां बेड खाली नहीं था। दूसरी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई। किंतु हृदयाघात से नहीं बच सके। बेटे रोहित बबेजा ने शांतिधाम में मुखाग्नि दी।

केस 2 - भाेपाल एम्स में नहीं मिला बेड
लायंस क्लब के पूर्व सचिव रमाकांत सैनी (58) की भारत टॉकीज रोड पर घरेलू इलेक्ट्राॅनिक्स सामान अाैर िसलाई मशीन की शॉप है। घर बालाजी मंदिर के पास है। परिवार में ये चौथी मौत है। इनकी कोविड टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। लंग्स में इंफेक्शन था। परिजन भोपाल ले गए। एम्स में बेड नहीं मिला। निजी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। दूसरी जांच में पता चला लंग्स में इंफेक्शन 95% फैल चुका था।

केस 3 - अस्पताल में बेड नहीं, घर पर इलाज
इटारसी न्यास कॉलोनी में 70 वर्षीय प्रेमलता ओसवाल की कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई थी। पुत्र अनाज व्यापारी शैलेश ओसवाल ने बताया, मां को सर्दी जुकाम था। दो निजी डॉक्टरों का इलाज चल रहा था। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। लंग्स में इंफेक्शन था। इटारसी-होशंगाबाद के हॉस्पिटल में बेड खाली नहीं मिला। घर पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया। ऑक्सीजन लेवल 60 से 85 तक आ गया था, लेकिन निधन हो गया।

केस 4 - रेमडेसिविर के 5 डोज लगे फिर भी नहीं बच सकी जान
कोरोना के कारण न्यास कॉलोनी निवासी पापड़- मसाले के सप्लायर अजीत जैन (49) का निधन हाे गया। वे रेलवे खिलौना कांट्रैक्टर रमेश चंद जैन व आदिनाथ मंदिर समिति सदस्य आनंद जैन के भाई थे। अजीत फैमिली के साथ ललितपुर में थे। अचानक तबीयत बिगड़ी तो सागर में एडमिट करवाया। भोपाल के एक बड़े अस्पताल में लाए। उन्हें लंग्स में इन्फेक्शन होने के कारण रेमडेसिविर के 5 इंजेक्शन लग चुके थे।

इनको मिला जीवनदान

  • इटारसी में पंजाबी मोहल्ले के ट्रांसपोर्ट व्यवसाई व कांग्रेसी नेता जसपाल सिंह भाटिया को सर्दी बुखार के बाद सांस लेने में दिक्कत हुई थी। सैंपल टेस्ट करवाया तो कोरोना पॉजिटिव था। इन्होंने खेत से आते समय एक व्यक्ति को गाड़ी में लिफ्ट दी थी। इलाज के लिए नागपुर के एक हॉस्पिटल में भर्ती हुए। अब स्वस्थ होकर घर आ गए हैं।
  • इटारसी नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष रवि किशोर जायसवाल, उनके भाई राजेश और भतीजा सजल तीनों नागपुर व सावनेर के हॉस्पिटल में कोरोना का इलाज करवाने के बाद ठीक हो गए हैं। इन्होंने बतौर सावधानी सीटी स्कैन करवाया क्योंकि बिना बुखार के भी कोरोना हो रहा है। लंग्स के कुछ स्पॉट पर इंफेक्शन मिला। कोविड रिपोर्ट निगेटिव थी।

केस बढ़े तो सैंपलिंग का नया फरमान

​​​​​​​90 से कम ऑक्सीजन तो ही होगी फीवर क्लीनिक में जांच

कोरोना के केस बढ़े तो स्वास्थ्य विभाग ने 90 से कम ऑक्सीजन वालों की ही जांच करने का फरमान जारी कर दिया। जिला अस्पताल की फीवर क्लीनिक में सामान्य मरीजाें की काेराेना की जांच नहीं की जा रही है। क्लीनिक में पहुंचने वाले मरीजाें काे काेराेना जांच करवाने के लिए घंटाें खड़े रहना पड़ रहा है। अब सीरियस और 90 से कम ऑक्सीजन लेवल वाले मरीजाें की जांच की जाएगीं। लेकिन यहां पर स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा काेई नाेटिस नहीं लगाया है। ताकि लोगों को पता चल सके कि काेराेना की जांच नहीं हाेगी।

नियम से ही कर रहे जांच

  • ^फीवर क्लीनिक में गंभीर और 90 ऑक्सीजन लेवल से कम वालाें की जांच की जा रही है। गाइडलाइन के मुताबिक जांच की जा रही है। - डाॅ.दिनेश दहलवार,सीएस
  • जिले में 10 क्लीनिक पर रोज 100 लाेगाें की जांच की जा रही है। अधिकांश लाेग स्वयं ही जांच के लिए पहुंच रहे हैं। वह पहले डाॅक्टर काे जांच करवाएं। - डाॅ.दिनेश काैशल,सीएमएचओ
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