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160 साल बाद संयोग:दो दिन बाद अधिकमास, 17 अक्टूबर से शुरू होंगी शारदीय नवरात्र, 160 साल बाद बन रहा खरीददारी का श्रेष्ठ मुहूर्त

होशंगाबाद11 दिन पहले
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  • श्राद्ध और नवरात्र के बीच एक महीना तक चलेगा अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास

भाद्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि से हर वर्ष पितृ पक्ष का आरंभ होता है। इस बार 17 सितंबर को सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध के साथ पितृपक्ष संपन्न होंगे। परंपरा के अनुसार श्राद्धपक्ष की सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन दुर्गा पूजा शुरू हो जाती है, लेकिन इस साल पितृ पक्ष और नवरात्र के बीच में अधिकमास पड़ रहा है, जिसकी वजह से एक महीने के अंतराल के बाद 17 अक्टूबर ही शारदीय नवरात्र शुरू होंगे।

इस दौरान मलमास में नामकरण और यज्ञोपवीत संस्कार नहीं किए जाएंगे, हालांकि इस बार खरीददारी के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त मलमास में हैं। पंडितों ने बताया कि लगभग 160 साल बाद यह संयोग बन रहा है जब अश्विन मास में अधिकमास (मलमास) लग रहा है और एक महीने के अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ हो रही है।

इस वर्ष 2020 (विक्रम संवत्सर 2077) में अधिकमास की दो तिथियां कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तथा शुक्ल पक्ष की तृतीया का क्षय 18 अक्टूबर को है। बता दें कि 18 सितंबर को अधिकमास के रूप में प्रथम आश्विन की शुरुआत होगी और यह 16 अक्टूबर तक चलेगा, इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। श्राद्ध पक्ष के बाद अधिकमास में कोई बड़ा त्योहार नहीं होगा।

इस माह में चतुर्थी (20 सितंबर और 5 अक्टूबर), एकादशी (27 अक्टूबर और 13 अक्टूबर), पूर्णिमा 1 अक्टूबर और अमावस्या 16 अक्टूबर विशेष तिथियां रहेंगी। इसके बाद 17 अक्टूबर को घट स्थापना के साथ ही नवरात्र की शुरुआत होगी। 25 अक्टूबर तक नवरात्र होगी। 26 अक्टूबर को दशहरा और 14 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी।

पुरुषोत्तम मास में करे प्रभु का सिमरन और दान-पुण्य
पुरुषोत्तम मास में भगवत कथा, दान-पुण्य, भजन-पाठ और प्रभु सिमरन बेहद फलदायी है। इस माह किए गए धर्म-कर्म से मानसिक अशांति भी दूर होती है। इससे विचारों की पवित्रता बढ़ती है और मनुष्य का मन शांत रहता है। अधिकमास को मलमास यानी मलिन मास माना जाता है। इस वजह से कोई भी देवता इस मास का स्वामी बनना नहीं चाहता। इसलिए इस मास को भगवान विष्णु का मास माना जाता है।

मंगल कार्य के लिए डेढ़ महीने का इंतजार
इस बार 2 सितंबर से शुरू हुए श्राद्ध पक्ष के बाद 16 अक्टूबर तक कोई भी मांगलिक कार्य अथवा शुभ मुहूर्त नहीं है, इसके लिए डेढ़ महीना प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। मलमास में नामकरण संस्कार और यज्ञोपवीत संस्कार नहीं किए जाते हैं। लेकिन विवाह की तारीख तय की जा सकती है। घर की बुकिंग की जा सकती है। घर के लिए जरूरी सामग्री खरीदी जा सकती है।

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