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बांधवगढ़ की बाघिन को चूरना में छोड़ा:बफर जोन के गांव में दिख रही थी बाघिन, दिन में रेस्क्यू कर रात में छोड़ा, 4 माह पहले बांधवगढ़ से आई है बाघिन

होशंगाबाद2 महीने पहले
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बाघिन काे रेस्क्यू कर रात में जंगल में छोड़ा गया। - Dainik Bhaskar
बाघिन काे रेस्क्यू कर रात में जंगल में छोड़ा गया।

सतपुड़ा टाइगर रिर्जव (STR) के अंतर्गत आने वाले बफर जोन में लंबे समय से अपनी टेरिटरी में घूम रही बांधवगढ़ की बाघिन को चूरना रेंज में छोड़ा गया। STR के अधिकारियों की मौजूदगी में मंगलवार रात 3 बजे बाघिन को कोर जोन के अंतर्गत बाड़े में छोड़ा गया।

एसटीआर के डिप्टी डायरेक्टर सुशील कुमार प्रजापति ने बताया बाघिन का मूवमेंट बफर जोन के रैनापानी, सिंगोरा, मंदिया सहित कई गांवों के नजदीक बना हुआ था। इससे ग्रामीणों में भय था। सोमवार को दिन में कुकरा गांव के पास बाघिन को रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के लिए वन विभाग का अमला सुबह से ही मौके पर पहुंच गया था। वन अधिकारियों की उपस्थिति में बाघिन काे जिप्सी एवं हाथियों से घेराव करके बेहोशी का डाट लगाया गया। रात 3 बजे उसे कोर एरिए के अंतर्गत बाड़े में छोड़ा गया। इस दौरान डिप्टी डायरेक्टर सुशील प्रजापति, डॉक्टर गुरुदत्त शर्मा, एसडीओ संदेश माहेश्वरी, रेंजर जीएस निगवाल सहित डिप्टी रेंजर वन स्टॉफ मौजूद रहा।

बाघिन का रेस्क्यू हाथी की मदद से किया।
बाघिन का रेस्क्यू हाथी की मदद से किया।

बांधवगढ़ से 4 माह पहले लाई गई है बाघिन

3 वर्षीय बाघिन को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से पिछले 4 माह पहले ही लाया गया है। जिसे कोर एरिए में छोड़ा गया। जो चलकर बफर जोन में ग्रामीण इलाकों में आ गई। 19 अगस्त को भी बाघिन को कामती ग्राम के समीप छोड़ा गया। जो फिर से बैतूल, छिंदवाड़ा और होशंगाबाद जिले की सीमाओं को पार करते हुए सोहागपुर के बफर एरिए में दिखाई देने लगी। पिछले एक-डेढ़ माह से बाघिन का मूवमेंट हो रहा था। जिससे ग्रामीण भयभीत थे।

सोमवार को रेस्क्यू करते अधिकारी।
सोमवार को रेस्क्यू करते अधिकारी।
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