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खेती-किसानी:बारिश नहीं होने से सोयाबीन फसल पर पीला मोजेक का अटैक, पत्ते पीले पड़े, डंठल सूखे

हाेशंगाबाद2 महीने पहले
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होशंगाबाद। डोलरिया तहसील के अधिकांश खेतों की सोयाबीन की फसल में पीला मोजेक रोग लगा।
  • कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी कर रहे जिले के गांवों का दौरा, किसानाें काे दे रहे सलाह
  • सोयाबीन की फसल में पीला मोजेक रोग की एेसे हाेती पहचान

जिले में पानी नहीं गिरने से सोयाबीन की फसलों में पीला मोजेक रोग लगने लगा है, जिससे किसानों फसल को लेकर चिंता सताने लगी है। कृषि अधिकारियाें ने स्थिति काे देखते हुए किसानाें काे अलर्ट किया है। साथ ही आवश्यक सलाह दी है। वैज्ञानिकों ने भी फसलें देखीं है। अब किसान फसल काे बचाने के लिए जुट गए हैं। जिले में इस बार पूरे क्षेत्र में सोयाबीन की फसल की 75 हजार हेक्टेयर में बोवनी की गई है। जून माह में पानी गिरने के साथ ही किसानों ने जल्दबाजी ने सोयाबीन कि फसल की बोवनी कर दी थी, लेकिन बारिश न होने से फसलों में पीला मोजेक रोग लगने लगा है।

अब किसान रोग से छुटकारा पाने फसलों में कीटनाशक डाल रहें हैं। डाेलरिया के किसान संजय परिहार ने बताया कि खेत में लगा साेयाबीन पीला पड़ने लगा है। पीला माेजेक लग गया है। इसी तरह किसान संदीप भदाैरिया ने बताया कि डाेलरिया के पास उनके खेत में नुकसान हाे रहा है। यदि पानी नहीं गिरा ताे फसल और खराब हाे जाएगा। वहीं गाैरा गांव के किसान अभिषेक मीणा ने 16 एकड़ में साेयाबीन लगाया है। अभिषेक ने बताया कि बोवनी के बाद बारिश न होने से एक तो खरपतवार दवा समय से नहीं डाल पा रहे हैं, जिससे खरपतवार फसलों को दवा रहा है वहीं पानी न गिरने से फसलों के पत्ते भी पीले हो रहे हैं जिससे फसलों को नुकसान की संभावना है।

इस संबंध में उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह जो फसलें में पीले पत्ते पड़ रहे हैं इसे पीला मोजेक रोग कहते हैं जो बारिश के अभाव और गर्मी सफेद मक्खी से फैलता है। यह राहत की बात है कि फिलहाल जमीन के अंदर नमी बनी हुई है, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों के दल जिले के गांवों का दौरा कर किसानाें काे सलाह दे रहे है।

तना मक्खी कीट : सोयाबीन फसल पर स्टेम फ्लाई (तना मक्खी) कीट का असर दिखा। विशेषकर सोयाबीन की किस्म जेएस-95-60 में तने में छेद करके अंडा दिया है।

सलाह : तना मक्खी के नियंत्रण के लिए बीटासायफ्यूथ्रिन अइमिडाक्लोप्रिड का 140 मिली प्रति एकड़ के मान से छिड़काव करने की सलाह दी।

पीला मोजेक रोग : खेतों में पीला मोजेक रोग से प्रभावित फसल को उखाड़कर नष्ट करने पर रोग फैलता नहीं। पीला मोजेक फैलाने वाली सफेद मक्खी होती है। पानी कम गिरने से यह फैलता है।

सलाह : खेत में येलो स्टीकी ट्रेप का प्रयोग करें। इमिडाक्लोप्रिड नामक कीटनाशक दवा 17.5 एसएल को 250 मिली प्रति एकड़ के मान से छिड़काव करें।

फफूंद रोग : खेतों में राइजोक्टोनिया रूटरॉट (जड़ सड़न फफूंद रोग) के लक्षण पाए गए हैं। पौधों की पत्तियां नीचे से पीली पड़कर सूखती हैं। पौधा पीला पड़ जाता है। जड़ सड़ जाती है।

सलाह : नियंत्रण के लिए कार्बेनडाजिम 250 से 300 ग्राम प्रति एकड़ के मान से छिड़काव करें। जिससे दवा जड़ के पास तक पहुंच सके।

उड़द फसल में वेबब्लाइट रोग : पौधे की निचली पत्तियों में गलन होकर पत्तियों को प्रभावित करता है। पूरे खेत की पत्तियां काले रंग की दिखाई देती हैं।

सलाह: इसकी रोकथाम के लिए कार्बेनडाजिम 250 से 300 ग्राम प्रति एकड़ अथवा प्रोपेकोनाजोल 150 मिली प्रति एकड़ के मान से छिड़काव कर रोग को नियंत्रित कर सकते हैं।

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