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समस्या:जलाशयों की कैनाल सालाें से क्षतिग्रस्त, टेल एरिया में नहीं पहुंच पाता पानी

शाहपुर14 दिन पहले
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  • रबी सीजन में किसानाें काे नहीं मिलता पानी, होती है परेशानी
  • कैनाल सुधरने या पक्की बनने से सिंचाई क्षमता 50-50 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ जाएगी

ब्लॉक के जलाशयों में बारिश के माैसम में पानी ताे आ जाता है, लेकिन इस पानी का सदुपयोग कैनाल के क्षतिग्रस्त हाेने से नहीं हाे पाता है। आठ साल पहले हुई अतिवृष्टि में पावरझंडा, पहावाड़ी, मोतीढाना जलाशयों की मेन कैनाल क्षतिग्रस्त हाे गई थी। इन कैनालाें की मरम्मत आज तक नहीं हुई है।

इससे रबी सीजन में किसानाें काे परेशानी का सामना करना पड़ता है। जुगाड़ से नहरें चलती हैं। पावरझंडा की कैनाल में कई सालों से पाॅलीथिन डालकर पानी आगे बढ़ाया जाता रहा है। इससे जलाशय में सहेजा गया बहुत सा पानी व्यर्थ बह जाता है।

निशाना जलाशय की भक्तनढाना जाने वाली कैनाल के टेल एरिया में बीते साल तक विभाग पानी नहीं पहुंचा पाया है। मोतीढाना जलाशय की एक कैनाल का पानी जामपानी के पहले नाले पर बने पुल के बह जाने से आगे नहीं बढ़ता है। पहावाड़ी जलाशय की एक कैनाल भी क्षतिग्रस्त है। पुराने जलाशयों की मिट्टी की नहरें बदहाल हैं।

इन जलाशयों की सभी नहरें पक्की हो जाएं, तो इनसे सिंचाई क्षमता भी बढे़गी और जल का अपव्यय भी रूकेगा। पावरझंडा की नहर मरम्मत और पुल बनने से 50 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बढे़गा। निशाना जलाशय की भक्तनढाना कैनाल की पाठई के पास वाली पुलिया सुधरने से 50 हेक्टेयर तथा मोतीढाना जलाशय की पुलिया सुधरने से 50 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा बढ़ जाएगी, लेकिन इसी तरफ अधिकारियाें का काेई ध्यान नहीं है।

13 सिंचाई जलाशयों से करीब 2900 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा

ब्लॉक में जलसंसाधन विभाग के 13 सिचाई जलाशयों से करीब 2900 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा मिलती है। इस बार 885.00 एमएम बारिश हाे चुकी है। सिंचाई जलाशयों में जलभराव कम हुआ है।

व्रतमान में मोखा जलाशय 9 फीट, देशावाड़ी जलाशय 10 फीट, निशाना जलाशय 16 फीट, मोतीढाना जलाशय 5 फीट, पहावाड़ी जलाशय 10 फीट, बरेठा जलाशय 7 फीट, चिलमटेकरी जलाशय 8 फीट, डुल्हारगढ़ जलाशय 6 फीट, पावरझंडा जलाशय 18 फीट, सालीमेट जलाशय 15 फीट, हाथीकुंड जलाशय 7 फीट, बुड्ढी जलाशय 10 फीट,पाठई जलाशय 5 फीट तक पानी है।

जलसंसाधन विभाग के अधिकांश सिंचाई जलाशयों से पिछले साल 1 पलेवा और 2 पानी मिला था। इस बार क्षेत्र में कहीं कम कहीं अधिक बारिश होने से ऐसे हालात बने हैं। सितंबर माह के पहले 2 सप्ताह में 5 इंच बारिश हुई है। मानसून आगे मेहरबान हुआ तो जलाशयों में जल भंडारण में सुधार हो सकता है।

नहराें काे सुधारने की मांग,

किसानाें काे रबी सीजन में पानी की ज्यादा आवश्यकता हाेती है। नहराें के क्षतिग्रस्त हाेने के कारण किसानाें के पास जलाशय का पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता है। नहराें की मरम्मत कर दी जाए ताे टेल एरिया तक आसानी से पानी पहुंच जाएगा और पानी काे लेकर हाेने वाली स्थित भी नहीं बन पाएगी। क्षेत्र के किसानाें जल संसाधन विभाग से जलाशय की नहराें काे सुधारने की मांग की हैै।

जलाशयाें की क्षतिग्रस्त कैनालाें की मरम्म्त करवाई जाएगी। पुराने जलाशय की मिट्टी की कैनाल पक्की करने के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियाें काे प्रस्ताव बनाकर दिया जाएगा, ताकि पानी का सदुपयाेग हाे सके।
- पीके बमनिया, एसडीओ जल संसाधन विभाग शाहपुर

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