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करीब एक साल से कृषि मंडी में नहीं है सुरक्षा:मंडी में सुरक्षा गार्डाें की कमी, व्यापारियाें की उपज काे नुकसान पहुंचा रहे मवेशी

टिमरनीएक महीने पहले
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उपज को नुकसान पहुंचाते मवेशी। - Dainik Bhaskar
उपज को नुकसान पहुंचाते मवेशी।

स्थानीय कृषि उपज मंडी में करीब एक वर्ष से सुरक्षा गार्ड नहीं है। इसके कारण आवारा मवेशी मंडी परिसर में घूम रहे हैं। मवेशी व्यापारियाें की उपज काे नुकसान पहुंचा रहे हैं। मवेशियाें काे राेकने के लिए गार्ड नहीं है। पहले मंडी परिसर की सुरक्षा के लिए गार्ड माैजूद रहते थे। गार्ड मवेशियाें पर नजर रखते थे। वर्तमान में मंडी में मूंग उपज की अच्छी-खासी आवक हाेने लगी है।

नीलामी के दाैरान व्यापारी मूंग की खरीदी कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य उपज की भी आवक हाे रही है। व्यापारी अपने अपने शेड में उपज खाली कराते हैं। लेकिन मवेशियाें से व्यापारी परेशान हैं। कई बार मवेशियाें के झुंड उपज पर लपकते हैं। इसके कारण तुलाई छाेड़कर हम्मालाें काे मवेशियाें काे भगाना पड़ता है। इससे कामकाज प्रभावित हाेता है।

अब सवाल यह उठता है जब मंडी प्रबंधन द्वारा मुख्यद्वार पर दोनों ओर के काऊकेचर लगा दिए गए हैं ताे मवेशी कहां से परिसर में आ जाते हैं। अनाज गल्ला व्यापारी संघ अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया दाेनाें गेट पर केचर लगे हाेने के बाद भी मवेशी मंडी परिसर में भरा रहे हैं। मंडी प्रबंधन काे मवेशियाें पर अंकुश लगाना चाहिए।

मवेशियाें से सबसे ज्यादा व्यापारियाें की उपज का नुकसान पहुंचाते हुए। खरीदी हुई उपज के ढेर में मवेशी मुंह मार देते हैं। यह समस्या बढ़ी है। प्रांगण प्रभारी राजेन्द्र धनौरिया का कहना है कि काऊ केचर बनने के बाद भी मवेशी कैसे अंदर आ रहे हैं, यह देखा जाएगा, ताकि व्यापारियाें द्वारा खरीदी गई उपज काे मवेशी नुकसान ना पहुंचा सके।

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