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संबोधन:गलत को गलत ना समझना सबसे बड़ा पाप है

आलीराजपुर7 महीने पहले
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हम सभी जाने-अनजाने में गलतियां करते हैं। गलती का एहसास होना अर्थात अपने गलत कर्म का भान होना और गलती के लिए माफी मांग लेना, उस गलती के बोझ को समाप्त कर देता है। गलती होना वास्तव में गलती तो है पर इतनी बड़ी नहीं, लेकिन अपनी गलती को महसूस ना करना यह उससे भी बड़ी गलती है।

सच्चे दिल से माफी मांगने का अर्थ है कि हम उस गलती को इतनी गहराई से महसूस करें कि दोबारा कभी भी किसी के भी साथ वो गलती ना दोहराएं। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रहमा कुमार नारायण भाई ने महात्मा गांधी मार्ग स्थित ब्रह्मकुमारी सभागृह में जीवन को खुशनुमा कैसे बनाए विषय पर नगर वासियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

इस अवसर पर ब्रह्मा कुमारी सेना बहन ने बताया कि जीवन में सुखी रहने के लिए दो शक्तियों का होना बहुत ही जरूरी है...पहली सहन-शक्ति और दूसरी समझ-शक्ति। सिर्फ विचार पढ़ लेना, विचार सुन लेना काफी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि हमारे भीतर से एक साहस, एक हिम्मत उभरे जो श्रेष्ठ कामों के लिए चल पड़े और दुष्वृत्तियों से लड़े। श्रेष्ठ मार्ग पर चलने के लिए बहादुरी की जरूरत है।

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