पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Indore
  • Aliraj pur
  • We Have A Treasure Of Happiness. On This Subject, Brahma Kumar Narayan Bhai Said If There Is No Happiness In Life, Everything Is Useless.

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

संबोधन:खुशी का खजाना हमारे पास है विषय पर ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने कहा- जीवन में खुशी नहीं तो सबकुछ बेकार है

आलीराजपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

विचार करें संसार से मिलने वाली खुशी ज्यादा देर टिकने वाली नहीं है। क्योंकि संसार ही टिकने वाला नहीं है। संसार हर पल बदल रहा है तो उस बदलने वाले संसार से मिली हुई खुशी कैसे स्थिर रह सकती है। संसार से मिलने वाली खुशी जितनी ज्यादा होगी उस खुशी में दु:ख की संभावना भी उतनी ही ज्यादा होगी।

जो खुशी बिना कारण अंदर से आती है। आपके अस्तित्व से आपके होने से आती है। वो खुशी सदा सर्वदा है और कभी जाने वाली नहीं है। ये बिल्कुल आपके श्वांस के साथ हर पल रहेगी। इस खुशी की अनुभूति तब होगी जब आपके विचार आपका ध्यान बाहरी वस्तुओं से हटेगा। जब आप स्वस्थ होंगे स्वयं में स्थित होंगें।

यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने खुशी का खजाना हमारे पास है विषय पर दीपा की चौकी स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह से शहरवासियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा जब आपके हृदय रूपी सरोवर में विचारों की तरंगें शांत होंगी।

संसार की सबसे मूल्यवान चीज है तो खुशी। खुशी है तो जहान है, खुशी नहीं तो सब कुछ होते हुए भी बेकार है। सच्ची खुशी का आधार श्रेष्ठ चिंतन, शुद्ध विचार ,सकारात्मक चिंतन है। सकारात्मक चिंतन का आधार श्रेष्ठ ज्ञान, ईश्वरीय ज्ञान है। परमात्मा ने हमें यह बताया कि आप भौतिक शरीर नहीं बल्कि इस भौतिक शरीर को चलाने वाली चैतन्य आत्मा है, जब यह ज्ञान स्वयं को हो जाता है तो जीवन में अविनाशी खुशी स्वत: ही बनी रहती है।

संग्रह से मनुष्य कभी मूल्यवान नहीं बनता

नारायण भाई ने कहा संग्रह से मनुष्य कभी भी मूल्यवान नहीं बन सकता। मनुष्य समाज में मूल्यवान बनता है तो वह सिर्फ अपने त्याग के कारण। भगवान शिव इसलिए नहीं पूजे जाते कि उनके पास स्वर्ण भंडार भरे पड़े हैं अपितु इसलिए पूजे जाते हैं कि स्वर्ण लंका का दान कर सकने की सामर्थ्य रखने पर भी वो खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करते हैं। त्याग की महिमा हमें भगवान शिव से सीखनी चाहिए। स्वयं मां अन्नपूर्णा के स्वामी होने पर भी जो पकवान और मिष्ठान नहीं, फल-फूल व पत्तों का रसपान कर अपना जीवन निर्वहन करते हैं। कुछ लोग जीने के लिए खाते हैं और कुछ लोग जीते ही खाने के लिए हैं।

जीने के लिए खाना सीखें

भगवान शिव का त्याग हमें यह संदेश देता है कि संग्रह आपको सुख साधन तो उपलब्ध करा देगा। लेकिन शांति, प्रसन्नता कभी भी नहीं दे पाएगा। इसलिए जीवन में प्रसन्न और समाज में प्रतिष्ठित रहना है तो खाने के लिए न जीकर जीने के लिए खाना सीख लो। जिन्दगी की दौड़ में जो लोग आपको दौड़ कर नहीं हरा पाते वही आपको तोड़ कर हराने की कोशिश करते हैं।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- व्यस्तता के बावजूद आप अपने घर परिवार की खुशियों के लिए भी समय निकालेंगे। घर की देखरेख से संबंधित कुछ गतिविधियां होंगी। इस समय अपनी कार्य क्षमता पर पूर्ण विश्वास रखकर अपनी योजनाओं को कार्य रूप...

और पढ़ें

Open Dainik Bhaskar in...
  • Dainik Bhaskar App
  • BrowserBrowser