ताेरण पर गणेशजी का फाेटाे नहीं हाेना चाहिए:क्याेंकि ताेरण एक राक्षस था: पं. मनीष भैया

बदनावरएक महीने पहले
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श्री दुर्गाधाम परिवार द्वारा ग्राम खेड़ा में श्रीमद् भागवत कथा करवाई जा रही है। दूसरे दिन भागवत आचार्य मनीष भैया ने बताया कि विवाह के समय जो तोरण मारी जाती है उस तोरण पर गणेशजी का फोटो नहीं होना चाहिए क्योंकि वह एक तोरण नाम का राक्षस है। जिसे मार कर ही वह अपनी पत्नी को वरण करता है। इस प्रकार दूल्हा-दुल्हन के पैर क्यों पखारे जाते हैं।

दुल्हन किस समय किस रूप में होती है और किस प्रकार वह एक बालिका से दुल्हन बनते हुए लक्ष्मी, सरस्वती, काली और अन्नपूर्णा बनती है। इस बारे में समझाया। कथा में भगवान भोलेनाथ और सती माता किस प्रकार अलग हुए और यह विधि का विधान क्यों बना। इस बारे में वर्णन किया। भरतजी एक हिरण के बच्चे के प्रेम में आकर अगला जन्म हिरण का पाया था। जो मनुष्य की अंत समय में मति होती है वही गति परमात्मा प्रदान करता है। इसलिए हर मानव को हर समय भगवान का कीर्तन और वर्णन करना चाहिए। समय का कोई भरोसा नहीं है इसलिए हर समय भगवान को भजे और जीवन को आनंदमय बनाना चाहिए। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में माता बहनें पहुंच रही हैं।

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