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कल्पसूत्र का वाचन पर्युषण में ही किया जाता है:कल्पसूत्र में सभी तीर्थंकरों के जीवन परिचय समेत अन्य विषयों का विवेचन

बदनावर22 दिन पहले
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सिर पर धारण कर कल्पसूत्र ले जाते हुए जैन समाज के सदस्य। - Dainik Bhaskar
सिर पर धारण कर कल्पसूत्र ले जाते हुए जैन समाज के सदस्य।

केवली आचार्य भद्रबाहू द्वारा रचित यह आठवां संस्करण पवित्र ग्रंथ श्री कल्पसूत्र है। इसका वाचन केवल पर्युषण पर्व में ही किया जाता है। हर कोई इसका वाचन नहीं कर सकता है। पूर्व में केवल साधु समुदाय में ही इसका वाचन होता था। लगभग 16 सौ वर्ष पूर्व से श्री संघ के सम्मुख इसकी वाचना होने लगी।

इस ग्रंथ में सभी तीर्थंकरों का जीवन परिचय, कालगणना, ज्योतिष, लांछन परिचय, स्वप्न शास्त्र, तीर्थंकर के अतिशय नाप पद्धति, ताैल पद्धति सहित कई विषयों का गहन विवेचन किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस ग्रंथ को 21 बार सविधि, संपूर्ण सुनने वाला 3 भव पश्चात मोक्ष रूपी शाश्वत सुख को प्राप्त करता है।

उक्त प्रवचन पर्युषण पर्व के चतुर्थ दिवस कल्पसूत्र की वाचना प्रारंभ करते हुए साध्वी प्रशमना श्रीजी ने कहे। इसके पूर्व कल्पसूत्र शास्त्र की शोभायात्रा अभय कुमार रोहित कुमार कोठारी के निवास से प्रारंभ हुई। पोषध शाला पहुंचने पर शास्त्र की अष्ट प्रकारी पूजा की गई। चांदी की गन्नियों से सूत्र को बधाया गया। पांच बार ज्ञान पूजा करने के पश्चात साध्वी को वाचना के लिए वोहराया गया। रात्रि में पक्खी प्रतिक्रमण कर समस्त जीव राशियों से क्षमा याचना की गई।

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