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आयाेजन:ओम पुण्याहाम-ओम प्रियतांम मंत्र के साथ ध्वजाराेहण किया , मंदिर के गर्भगृह में अखंड ज्योत की स्थापना की

बदनावर11 दिन पहले
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गुरुवार दाेपहर 12.39 बजे के विजय मुहूर्त में ओम पुण्याहाम, ओम प्रियतांम के मंत्राें के साथ शंखेश्वरपुरम् तीर्थ पर ध्वजारोहण हुआ। मुनि जितचंद्रविजयजी ने जिन मंदिर और मुनि जिनभद्रविजयजी ने गुरुदेव राजेंद्रसूरिश्वरजी के गुरु मंदिर में क्रिया संपन्न कराई।

इसी के साथ दाहिनी और आदेश्वर भगवान एवं बाई और शांतिनाथ भगवान के शिखर पर एवं क्षेत्रपाल के शिखर पर भी नवीन ध्वजा चढ़ाई गई। इसके पूर्व तीर्थ परिसर से ध्वजा की शोभायात्रा शुरू हुई। इसमें सभी 5 लाभार्थियों ने ध्वजा को अपने सिर पर रख श्रीसंघ के साथ नाचते गाते हुए चौपाटी से होकर पुनः तीर्थ परिसर पहुंचे। जहां अक्षत उड़ाकर ध्वजा का स्वागत किया।

ध्वजा के दर्शन मात्र से ही जिन दर्शन का लाभ होता है

मंदिर के सभा मंडप में मुनि जितचंद्रविजयजी ने कहा जब हम किसी कारण से मंदिर नहीं जा पाते है अथवा मंदिर जब मंगल रहता है तब ध्वजा के दर्शन मात्र से भी हमें जिन दर्शन का लाभ प्राप्त होता है। हमें ध्वजा चढ़ाते हुए पूरे विश्व की मंगल कामना करना चाहिए एवं कषायों से रहित होकर ध्वजा लहराना चाहिए। जिससे हमारी आत्मा का एवं दर्शन करने वाले सभी का कल्याण हो।

लहराती हुई ध्वजा हमारे मन को प्रफुल्लित करती है एवं हमें कर्मशील बनने की प्रेरणा देती है। प्रवचन पश्चात सभा मंडप में सत्तरभेदी पूजन हुई। ध्वज पूजा के शुरू होते ही पुनः ध्वजा को सिर पर रखकर तीर्थ परिसर की तीन प्रतिक्षण दी गई एवं ध्वजा को शिखर तक पहुंचाया गया। जहां ध्वज दंड की क्रमशः अष्ट प्रकारी पूजा की गई एवं शुभ मुहूर्त में घटंनाद होते ही ध्वजारोहण संपन्न हुआ। ध्वजारोहण की समस्त क्रिया विधि कारक हसमुखभाई जैन मोहनखेड़ा वाले ने संपन्न कराई।

मुनि ने सभी को सामूहिक चैत्यवंदन कराते हुए मांगलिक सुनाई। पूरे वर्ष के लिए अष्ट प्रकारी पूजा के चढ़ावे बोले गए। मुख्य मंदिर के गर्भ गृह में अखंड ज्योत की स्थापना की गई। इसका 1 वर्ष का लाभ देसूरी राजस्थान निवासी राकेश भाई कुंदनमल बोराणा परिवार ने लिया। अंत में साधर्मिक वात्सल्य हुअा। संपूर्ण व्यवस्था आदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेतांबर पेढ़ी मोहनखेड़ा की ओर से की गई।

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