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पर्युषण भोग का नहीं त्याग का पर्व है: जैन:पर्युषण पर्व के अवसर पर उत्तम मार्दव धर्म मनाया गया

नालछा6 दिन पहले
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नालछा. पर्युषण पर्व के दाैरान धार्मिक संस्कार करते हुए जैन समाज के सदस्य। - Dainik Bhaskar
नालछा. पर्युषण पर्व के दाैरान धार्मिक संस्कार करते हुए जैन समाज के सदस्य।

नालछा के प्रसिद्ध अति क्षेत्र कागदीपुरा दिगंबर जैन तीर्थ पर पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन समाज के अनुयाई पहुंचे। पूजा-अर्चना के साथ महा आरती की। दिगंबर जैन जिनालयों पर सुबह श्रीजी भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के साथ प्रवचन, तत्वार्थ सूत्र का वाचन, प्रतिक्रमण, महाआरती की गई।

तीर्थ इस पर्व में जातक विभिन्न आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि योग जैसी साधना तप-जप के साथ करके जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करते हैं। श्वेतांबर इस पर्व को 8 दिन और दिगंबर संप्रदाय के जैन अनुयायी इसे दस दिन तक मनाते हैं। जैन धर्म के लोगों का यह मुख्य पर्व होता है।

वहीं संध्या को भगवान की महाआरती आयोजित की गई। इस दौरान जैन समाज के लोगों ने केसरिया धोती व दुपट्टा धारण कर इंद्र बनके सभी विधिविधान का पालन किया। पर्युषण पर्व के अवसर पर उत्तम मार्दव धर्म मनाया गया। मार्दव धर्म से अपने जीवन में अहंकार को, मान को अपने जीवन के उद्धार के लिए त्याग की भावना का संकल्प दिलाती है। भगवान के अभिषेक शांति धारा करने का सौभाग्य विमलचंद गोधा परिवार को मिला।

पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर प्रकाश डालते हुए विमल जैन ने बताया कि कपट रूप व्यवहार तुम कभी मत करो। सदैव अपने मन-वचन और कर्म को एक रखो। अपने चंचल चित्त रोकने के लिए आर्जव का सहारा लो। इस अवसर आशिष जैन, अजित छाबड़ा, संजय लुहाड़िया, संभव काला, अंकित व अमन जैन व पीथमपुर व महू व धार के समाज जन उपस्थित थे।

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