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विधानसभा उप चुनाव:350 की आबादी वाले बड़लीपाड़ा के ग्रामीण दो किमी दूर से लाते हैं पानी, मजदूरी नहीं मिलने से दो वक्त की रोटी का संकट

बदनावरएक महीने पहले
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  • बदनावर तहसील मुख्यालय से 4 किमी दूर स्थित गांव के हाल, दोनों दल विकास की बात कर रहे लेकिन धरातल पर स्थिति उलट

विधानसभा उपचुनाव में दोनों दल के एजेंडे में विकास की बातें कही जा रही हैं। पहले भी दोनों दल की सरकारें रहीं। चुनाव के बाद धरातल पर विकास हाेता नहीं है। भास्कर टीम क्षेत्र की ग्राम पंचायत भेरुपाड़ा के गांव बड़लीपाड़ा में वास्तविकता जानने पहुंची।

जहां न तो ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध है न ही सड़क की सुविधा मिली। स्वच्छ भारत मिशन में बने शौचालय का निर्माण अधूरा पड़ा है। मजदूरों को दो माह से मजदूरी का भुगतान नहीं होने से दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आर्थिक संकट के चलते बच्चों के तन पर कपड़ा तक नहीं मिल पाता।

जबकि कांग्रेस-भाजपा के चुनावी एजेंडे में गरीबों को प्राथमिकता वाली योजनाएं शामिल हैं। बदनावर तहसील मुख्यालय से मात्र 4 किमी की दूरी पर स्थित गांव बड़लीपाड़ा में 40-50 झाेपड़े बने हैं। इसमें 350 से अधिक लोग रहते हैं। शहर के नजदीक होने से यहां के रहवासी विकास की उम्मीद में वृद्धावस्था में पहुंच गए। समूची पंचायत क्षेत्र में एकमात्र हैंडपंप है, जिसमें बारिश के सीजन में ही पानी उपलब्ध रहता है। शेष दिनों में पेयजल के लिए ग्रामीणाें काे भटकना पड़ता है।

25 वर्षीय तेजाबाई पति रमेश ने बताया अब तक हमारे गांव में कोई नेता या अधिकारी नहीं पहुंचे। शासन की किसी योजना का लाभ नहीं मिला है। 24 वर्षीय सुगाबाई छगन ने बताया पानी के लिए डेढ़ से दो किमी दूरी तय कर सड़क पर लगे हैंडपंप तक पहुंचना पड़ता है। जहां भीड़ लगने से पानी भरने में समय लगता है। इससे दूसरे काम नहीं कर पाते।

गांव में न तो सड़क बनी है न शासन की अन्य योजनाओं का लाभ मिला। 45 वर्षीय ईश्वर ने बताया गांव में केवल दो लोगों को ही प्रधानमंत्री आवास का लाभ मिला। शौचालय का निर्माण भी आधा-अधूरा करने से अनुपयोगी है। कहीं पाइप नहीं लगाए तो कहीं सीट का अभाव है। राशन लेने भी अन्य गांव में जाना पड़ता है।

आर्थिक संकट के चलते बच्चों के तन पर कपड़ा तक नहीं मिल पाता

तालाब की पाल बनाने में मजदूरी की, राशि आज तक नहीं मिली

गांव की महिलाओं ने बताया पिछले दिनों तालाब की पाल निर्माण में मजदूरी की थी। जिसकी दो माह की बकाया मजदूरी अब तक नहीं मिली है। हमारे सामने जीवन व्यापन की समस्या है। यहां तक की बच्चों का तन ढंकने के लिए कपड़े भी नहीं हैं।

आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। 65 वर्षीय भंवरी बाई ने बताया पति का निधन तीन साल पहले हो गया था। विधवा पेंशन का लाभ अभी तक नहीं मिला है। इसी गांव के मोहल्ले अंबापाडा के चंदू ने बताया हम तो गड्ढे में पड़े हैं। चुनाव में केवल प्रचार वाहन आता है। कोई भी दल का प्रत्याशी नहीं पहुंचा। फिर भी एक दल के कई मकानों पर झंडे दिखने लगे हैं।

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