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क्षमापना पर्व:सच्चे मन से हम क्षमा ना ही मांगते हैं ना ही किसी को क्षमा कर पाए हैं : साध्वीश्री

बदनावर6 दिन पहले
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प्रतिवर्ष हम एक दूसरे से क्षमा मांगते हैं लेकिन क्षमा के भाव हमारी अंतरात्मा में नहीं उतरते हैं। हमने इस पवित्र दिन को औपचारिक बना दिया है। बैर के संबंध तो हमारे कई भवों से चले आ रहे हैं लेकिन सच्चे मन से हम क्षमा ना हीं मांगते हैं ना ही किसी को क्षमा कर पाए हैं।

हमें यह मनुष्य जन्म प्राप्त हुआ है इसका लाभ उठाकर जन्मों-जन्मों से चले आ रहे बेर संबंधों को क्षमा मांग कर समाप्त करें। उक्त प्रवचन साध्वी प्रशमना श्रीजी ने क्षमापना पर्व के अवसर पर सामूहिक क्षमा याचना में कहे। इसके पूर्व शुक्रवार को समस्त समाज जनों ने उपवास सहित विभिन्न तपस्या की।

संध्या को वार्षिक प्रतिक्रमण कर प्राणी मात्र से अपने द्वारा की हुई भूलों की मन, वचन एवं काया से क्षमा याचना की। शिला सराफ, चेतना सराफ, नरेंद्र सराफ, महावीर चोरड़िया, मुक्ता सुंदेचा, विमलेश पगारिया, निकिता कोठारी, अनुषा सूंदेचा, नीतेश तातेड, मुकेश कोठारी ने अपने विचार रखे।

विभूति चत्तर, छवि छाजेड़, मेघा पटवा, ख्याति तांतेड, भव्या लोढ़ा ने गीत प्रस्तुत किए। सभा के अंत में 8 वर्षीय बालिका का कुमारी ऋषि का बोकड़िया द्वारा आठ उपवास की तपस्या करने पर श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया।

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