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कुएं-बावड़ियों की सफाई शुरू:100 में से 18 की सफाई पूरी, दिल्ली की टीम करेगी पानी का टेस्ट

देवास19 दिन पहले
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रानी बाग की बावड़ी सफाई के बाद। - Dainik Bhaskar
रानी बाग की बावड़ी सफाई के बाद।
  • भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था यह मुद्दा, निगम कमिश्नर ने कहा था-जल्द संवारेंगे कुएं-बावड़ियां

शहर में 100 से अधिक कुएं-बावड़ियां हैं, जिन्हें संवारने का काम नगर निगम द्वारा शुरू कर दिया गया है। पिछले एक सप्ताह से लगातार काम जारी है। तीस लाेगों की टीम इसके लिए काम कर रही है, अब तक 18 से ज्यादा कुएं बावड़ियों की साफ सफाई हाे चुकी है। जल शक्ति अभियान के तहत यह काम नगर निगम कमिश्नर विशाल सिंह चाैहान के निर्देश पर शुरू किया गया है। निगम की याेजना है कि अगस्त से पहले उक्त सभी कुएं बावड़ियों की साफ सफाई कर इन्हें संवारा जाएगा, इसके बाद अगस्त के माह में दिल्ली से वैज्ञानिकांे की टीम यहां आकर पानी की टेस्टिंग करेगी, जिन बावड़ियों का पानी पीने याेग्य हाेगा, उन्हें जलस्राेतों के ताैर पर ठीक ढंग से संवारा जाएगा।
बता दें कि इस मामले काे भास्कर ने दाे माह पहले प्रमुखता से प्रमुखता से प्रकाशित किया था, तब निगम कमिश्नर सिंह ने कहा था कि शहर के इन कुएं बावड़ियांे काे संवारने का काम जल्द शुरू किया जाएगा, इसी के तहत अब यह कवायद शुरू की गयी है। इसमें मां काली एंड सप्लायर एजेंसी भी कार्य कर रही है, जिसके 17 वर्कर और नगरनिगम का अमला अलग कुल तीस लोग संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं, 12 दिनों में अभी तक 11 कुआं और 7 बावड़ियों सहित कुल 18 की सफाई हो चुकी है।
पानी की टेस्टिंग के लिए अगस्त में आएगी टीम
सब इंजीनियर दिलीप मालवीय ने बताया जलशक्ति अभियान के द्वारा शासन की योजनानुसार वरिष्ठ अधिकारी के आदेशानुसार शहर के प्राचीन कुआं और बावड़ियों की सफाई कर उनका पानी लोगों के उपयोग लायक किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में शहर में जलसंकट न हो। साथ ही वैज्ञानिक द्वारा पानी की टेस्टिंग कराने की योजना बनाई जा रही है, अगस्त में इसके लिए दिल्ली से वैज्ञानिकाें का विशेष दल देवास अाएगा।
इतिहासकार बाेले-बावड़ियों से बुझती थी 40 हजार की आबादी की प्यास

शहर के इतिहासकार जीवन सिंह ठाकुर बताते हैं कि देवास शहर में जलस्राेतों के ताैर पर एक समय में यहां कुएं बावड़ियां ही प्रमुख थे। सन 1960 के दशक में शहर की आबादी लगभग 40 हजार थी, उस समय मीरा बावड़ी, रानी बाग की बावड़ी, मेंढकी कुआं और विश्राम बाग की बावड़ियों से ही पानी की पूर्ति हाेती थी। यदि वैज्ञानिक तरीके से इन प्राचीन जलस्राेतों काे रिचार्ज किया जाए, ताे शहर में कभी भी पानी की कमी नहीं आएगी।

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