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वार्षिक बोलियों में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा:नगर भ्रमण के लिए निकले जिनेश्वर प्रभु की समाजजनों ने गहुली बनाकर की अगवानी

देवास6 दिन पहले
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नगर भ्रमण के लिए निकले जिनेश्वर प्रभु की गहुली बनाकर की अगवानी। - Dainik Bhaskar
नगर भ्रमण के लिए निकले जिनेश्वर प्रभु की गहुली बनाकर की अगवानी।

श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर तुकोगंज रोड पर पर्युषण महापर्व की पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में श्वेतांबर जैन समाज ने जिनेश्वर प्रभु की नगर भ्रमण यात्रा निकाली गई। समाज जनों ने अपने हाथों से प्रभु को नगर भ्रमण करवाया। श्रद्धालुओं ने अक्षत एवं श्रीफल की गहुली बनाकर प्रभु की भावभरी अगवानी की। ट्रस्ट मंडल, नवयुवक मण्डल, बहुमण्डल एवं महिला मण्डल झूमते नाचते हुए प्रभु नगर भ्रमण यात्रा में सम्मिलित हुए।

प्रवक्ता विजय जैन ने बताया इस नगर भ्रमण यात्रा में समाज जन विशेष वेशभूषा में उपस्थित थे। भगवान को नगर भ्रमण करवाने का लाभ दिलीप कुमार मांगीलाल जैन गौतमपुरा वाला परिवार ने प्राप्त किया। शासन माता को नगर भ्रमण कराने का लाभ संजय कुमार नेमीचंद जैन पद्मावती परिवार को मिला।

अखण्ड ज्योत का सौभाग्य जावंतराज नरेश कुमार भंडारी, मीनाक्षी बेन नगीन भाई सोलंकी, सुरेश कुमार बिरदीचंद शेखावत एवं सजन बाई अमोलकचंद जैन मामा परिवार को मिला। वार्षिक बोलियों में समाज के कई परिवारों ने उत्साहपूर्वक लाभ प्राप्त किया। अंत में साधर्मिक भक्ति का आयोजन हुआ।

अतिथि सम्मान विलास चौधरी, शैलेन्द्र चौधरी एवं अतुल जैन, राकेश तरवेचा एवं अजय संघवी ने किया। संचालन अशोक जैन मामा एवं दीपक जैन ने किया। आभार भरत चौधरी ने माना।

उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की, रंगोली प्रतियोगिता भी हुई
दिगम्बर जैन समाज के पर्युषण पर्व के तीसरे दिन श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर देवास पर उत्तम आर्जव धर्म की पूजा विधान एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम हुए। दिगम्बर जैन समाज के संजय कटारिया जैन ने बताया कि शांतिधारा करने का शोभाग्य सिद्धार्थ सेठी, सिद्धांत सेठी, ममता हेमन्त सेठी आदि ने प्राप्त किया। रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन पुष्प ग्रुप द्वारा किया गया। रात में आरती हुई।

प्रवचन में बताया-आर्जव धर्म का महत्व
पंडित डॉक्टर भागचन्द जैन जयपुर द्वारा प्रवचन में बताया कि उत्तम आर्जव धर्म का उत्तम लक्षण है, वह मन को स्थिर करने वाला है, पाप को नष्ट करने वाला है और सुख का उत्पादक है। इसलिए इस भव में इस आर्जव धर्म को आचरण में लाएं, उसी का पालन करो और उसी का श्रवण करो, क्योंकि वह भव का क्षय करने वाला है।

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