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ऑनलाइन संबोधन:संकल्पों में रचनात्मक शक्ति होती है

देवास6 दिन पहले
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हमारे प्रत्येक संकल्पों में रचनात्मक शक्ति होती है। आप चाहे तो शुद्ध सकारात्मक पवित्र संकल्प करके सुख, शांति, आनंद, शक्ति की अनुभूति कर सकते हैं या आप अशुद्ध, नकारात्मक, अपवित्र, संकल्पों की रचना करके जीवन को दुख, अशांति, तनाव समस्याओं से भर सकते हैं। आपके प्रत्येक संकल्प, बोल, कर्म भाग्य की रेखा तय करते हैं। बोल व कर्म के साथ संकल्प में बदला लेने की भावना, क्रोध की भावना है तो जीवन कभी भी सुख शांति से परिपूर्ण नहीं बन सकता है। मानव शाश्वत सुख-शांति की चाहना में बाहरी कर्मकांड तो कर रहा है लेकिन आंतरिक मन के विचार शुद्ध नहीं होने से प्रार्थना पूजा का संपूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है। ये विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रहमाकुमार नारायण भाई ने आओ जीवन को संवारें विषय पर शहरवासियों को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा आप सब पहले पंच तत्वों से बना हुआ पुतला देह नहीं आत्मा हो। आत्मा के ही गुण सुख, शांति के हैं।

मोह आसक्ति पैदा करता है और रुलाता भी है
लोभ बुद्धि को भटकाता है, डुबोता है। मोह आसक्ति पैदा करता है, रुलाता है। अहंकार पतन की जड़ है गिरा देता है, और आज हर मानव में देह अभिमान कि मैं फलाना, मैं फलाना हूं यह अभिमान मानव मन को नित्य पतन की ओर ले जा रहा है। इसीलिए मानव संस्कार दिन-प्रतिदिन गिरते जा रहे हैं। चारों तरफ दुख, अशांति, तनाव, बीमारी, करोना का भय व डर का हाहाकार मचा हुआ है। सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन ने सभी को बताया कि वर्तमान समय धर्म ग्लानि का समय है, धर्म अपनी राह छोड़ चुका है। धर्म का अर्थ धारणा और हम इसको भूल दैहिक धर्म को अपनाने से तेरे मेरे के चक्कर में फंस गए हैं। जब हम सभी को आत्मा समझेंगे तभी सभी में एक समानता आएगी। एक धर्म एक राज्य की धरा पर स्थापना होगी और वह सुख शांति से परिपूर्ण स्वर्ग कहलाएगा।

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