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टू-टर्न:6 मंडल में 18 सेक्टर प्रभारी और 5 हजार कार्यकर्ता, 500 भी नहीं पहुंचे

धार23 दिन पहले
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सड़क पर बैठकर चक्काजाम करते कांग्रेसी। - Dainik Bhaskar
सड़क पर बैठकर चक्काजाम करते कांग्रेसी।
  • अतिक्रमण तोड़ा तो पूरी कांग्रेस मैदान में, किसानों के लिए नहीं आए
  • ब्लाॅक अध्यक्ष- ऐन माैके पर आया चक्काजाम का फरमान, इसलिए नहीं जुटे

केंद्र सरकार के किसान बिल के विराेध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिले की चार विधानसभाओं में शनिवार काे चक्काजाम किया। धार विस के गुणावद में इंदाैर-अहमदाबाद हाइवे पर बड़े पैमाने पर आंदाेलन की घाेषणा के बाद पुलिस, प्रशासन का बड़ा अमला ताे जुटा, लेकिन कांग्रेस का आंदाेलन सांकेतिक रह गया। 6 मंडलम में 18 प्रभारी और 5 हजार कार्यकर्ताओं में से 500 भी नहीं पहुंचे।

पुलिस अधिकारी के कहने पर 15 मिनट में चक्काजाम समाप्त हाे गया। आंदाेलन के बाद कांग्रेस ने यह कहते हुए यूटर्न ले लिया कि हमने सांकेतिक प्रदर्शन किया था। ब्लाॅक अध्यक्ष डॉ. जाकिर पटेल ने प्रदेश संगठन पर मामला ढाेलते हुए कहा चक्काजाम का फरमान ऐन माैके पर आया इसलिए कार्यकर्ता नहीं जुटे, दूसरी तरफ कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालमुकुंद सिंह गौतम बाेले आंदाेलन प्रभारी से बात करेंगे कार्यकर्ता क्याें नहीं आए।

ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जाकिर पटेल का कहना है कि सुबह 11 बजे धरना प्रदर्शन शुरू कर दाेपहर 2.30 बजे खत्म किया। इस हाइवे पर वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है इसलिए प्रशासन को किए वादे के मुताबकि हमने यहां सांकेतिक प्रदर्शन किया।

सभा के बाद सड़क पर बैठे, पुलिस अधिकारी के कहने पर उठ गए
हाइवे किनारे टेंट, साउंड सिस्टम लगाया गया था। यहां धरने पर बैठे कांग्रेसियाें ने किसान बिल पर केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार काे जमकर काेसा। दाेपहर करीब 1 बजे तक सभा चली।

इसके बाद 1.30 बजे कांग्रेसी हाइवे पर बैठ गए। सड़क पर ट्रैक्टर लगा दिए गए। लगभग 15 मिनट तक कांग्रेसियों ने जमकर नारेबाजी की। वाहन जब ज्यादा रुकने लगे ताे एक पुलिस अधिकारी के कहने पर प्रदर्शनकारी सड़क से उठ गए। इस तरह दाेपहर 1.30 बजे धरना समाप्त हाे गया।

जिले में इन स्थानाें पर हुआ चक्काजाम

  • धरमपुरी विधानसभा के अंतर्गत खलघाट चौराहे पर ब्लाॅक कांग्रेस धामनोद एवं धरमपुरी के कार्यकर्तओं ने विधायक पांचीलाल मेडा के नेतृत्व में करीब ढाई घंटे धरना प्रदर्शन किया।
  • इंदाैर-अमदाबाद फाेरलेन स्थित भाेपावर चाैकड़ी पर सरदार-राजगढ़ के कार्यकर्तओं ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के नेतृत्व में एक घंटे तक प्रदर्शन किया।

कृषि कानून के विराेध ये तीन कारण
1.
नया कृषि कानून मंडी के बाहर व्यापारियों के लिए किसी भी नियमिति का प्रावधान नहीं करता। इससे व्यापारी मनमानी करेंगे। कृषि उत्पाद के बाजार में कारपोरेट घरानों के एकाधिकार स्थापित होने से छोटे व्यापारियों का व्यापार एवं व्यापारिक प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाएगी। मूल्य की ग्यारंटी नहीं है। सुरक्षित भुगतान व्यवस्था नहीं है।
2. कांट्रेक्ट फॉर्मिंग यानि ठेके की खेती का प्रावधान है। यदि फसल आने पर भाव कम हो गए तो कंपनी काे अनुबंध भाव में ही खरीदना पड़ेगा। भाव अधिक हो गया तो किसान को अनुबंधित भाव में ही बेचना पड़ेगा। किसान न तो पुलिस में शिकायत कर सकेगा और ना ही अदालत जा सकेगा।
3. नए कानून में व्यापारी जितना चाहे उतना माल स्टॉक कर जब चाहे मनमाने भाव में बेच सकता है। इसे ही मार्केट इकोनॉमी या पूंजीवाद कहते हैं जो पूंजीपति के पक्ष में और गरीब, किसान, मजदूर और उपभोक्ता के खिलाफ है।

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