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  • 48 Lakhs Recovered From The Depositors, 60 Lakhs Were Deposited Before The Deputy Commissioner Was Transferred

राजेंद्रसूरी बैंक घाेटाला:रसूखदारों से 48 लाख वसूले, 60 लाख जमा कराने वाले थे उससे पहले ही हो गया डिप्टी कमिश्नर का तबादला

धार7 दिन पहले
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  • राजगढ़ के राजेंद्रसूरी बैंक घाेटाले में उपभोक्ताओं को वापस पैसा दिलाने के लिए शुरू की खुली बैठकें

राजगढ़ की राजेंद्रसूरि बैंक घाेटाले में सख्ती से वसूली कराने वाले सहकारिता उपायुक्त अंबरीश वैद्य का तबादला झाबुआ हाे गया है। वैद्य ने एक माह की अवधि में बैंक के रसूखदार कर्जदाराें काे सहकारिता विभाग की न्यायालय में खड़ा रख 48 लाख रु. की वसूली की। अगले 15 दिनाें में सशर्त 60 लाख रु. कराए जाना थे। कुल एक कराेड़ रु. की राशि जमा हाेने की सकारात्मक स्थितियां उत्पन्न की जा चुकी थी। लेकिन राजनीति के चक्कर में उनका फिर तबादला हो गया। वैद्य इसके पूर्व अपनी इंदाैर पदस्थापना के दाैरान हाउसिंग माफिया और आलीराजपुर पदस्थापना में राशन माफियाओं पर कड़ा शिकंजा कस चुके हैं।

झाबुआ जिले में हाल ही में उचित मूल्य की दुकानाें पर गेहूं की हेराफेरी पर एक चर्चित पुलिस प्रकरण दर्ज करवा चुके हैं। झाबुआ पदस्थापना के दाैरान की गई कार्रवाई का ही परिणाम है कि वैद्य ने धार में एक माह के कार्यकाल में राजेंद्रसूरि बैंक से परेशान उपभाेक्ताओं की खुली बैठक बुलाकर अपनी पूरी कार्ययाेजना उनके समक्ष प्रस्तुत की। इसके साथ ही जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष और प्रशासक के अतिरिक्त प्रभार में 5.68 कराेड़ रु. की राशि जमा कराते हुए बैंक की आर्थिक स्थिति काे सुदृढ़ किया।

विवादित रही शेखावत, कर्मचारियों ने ज्ञापन देकर कहा- हम काम नहीं करेंगे
नवागत उपायुक्त सहकारिता भारती शेखावत का धार आना विवादित रहा है। अचानक आना और लिपिक पर निलंबन की कार्रवाई करना। इसके अलावा उनके व्यवहार काे लेकर भी शिकायतें होती रही है। ऐसे में कर्मचारियों ने उनके साथ काम करने तक से भी इंकार कर दिया था।

18975 उपभाेक्ताओं काे लाैटाने थे 83 कराेड़ रुपए

भास्कर की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि राजेंद्रसूरि बैंक में 200 कराेड़ के घाेटाला हाेने का तथाकथित लाेगाें ने प्रचार किया। वास्तविक स्थिति यह है कि इस बैंक के 18975 जमाकर्ताओं काे प्रारंभिक जांच में 83 कराेड़ रु. लाैटाए जाने थे। इन 83 कराेड़ के विरुद्ध बैंक संचालनकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज हाेने के पूर्व 29 कराेड़ की राशि लाैटाई जा चुकी थी।

वर्तमान में 90 कराेड़ रु. बकायादार ऋणियाें से लेना शेष है। जबकि जमाकर्ता काे 54 कराेड़ की राशि देना शेष है। इस साेयायटी की लगभग 15 कराेड़ की परिसंपत्तियां भी है। वैद्य ने बताया निर्वाचित संचालकाें के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना एक विवादित स्थिति है।

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