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शारदीय नवरात्री की आज से हुई शुरुआत:मराठी परम्परा के अनुसार मां गढ़कालिका को पहनाए गए वस्त्र, आभूषणों की सुरक्षा के लिए तैनात हुए पुलिस के जवान

धार17 दिन पहले
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मां गढ़कालिका की प्रतिमा - Dainik Bhaskar
मां गढ़कालिका की प्रतिमा

गुरुवार से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। मोहल्लों और गलियों में गरबे के लिए पांडल भी तैयार हो गए हैं। सरकार द्वारा जारी नई गाईडलाईंस के तहत ही आयोजकों द्वारा गरबे करवाए जाएंगे। साथ ही शहर के सबसे बड़े प्राचीन मंदिर गढ़कालिका में भी इस बार कोरोना के चलते सख्ती रहेगी। भक्त दूर से ही मां के दर्शन कर रहे हैं। इसी के साथ फेस कवर करना, मॉस्क लगाना अनिवार्य है। मंदिर में होने वाली पूजा और आरती में ट्रस्ट से जुड़े लोग और पंडित ही शामिल होंगे। मंदिर में सैनेटाईजर की व्यवस्था भी की जाएगी। वहीं मंदिर के ऊपरी हिस्से में मंदिर की परिक्रमा इस साल भी बंद है, भक्त सिर्फ हॉल की सीढ़ियों के नीचे से ही दर्शन कर रहे हैं। फूल, मालाएं भी वहीं पंडित को देना है। आज सुबह 6 से 7.30 बजे के बीच घट स्थापना की गई। घटस्थापना के दौरान राजवंश परिवार शामिल रहा। इसके बाद मंदिर में भक्तों के पूजा का सिलसिला शुरु हुआ। हालांकि, सुबह करीब 4 बजे काकड़ा आरती का आयोजन हुआ था। जिसमें शामिल होने के लिए शहर के कई लोग गाड़ियों के माध्यम से गढ़कालिका मंदिर पहुंचे थे। नवरात्रि के पहले ही मंदिर परिसर की रंगाई-पूताई का काम पूरा कर लिया गया था। मंदिर के बाहरी हिस्से में नगरपालिका ने सफाई और तालाब की पाल पर पूताई करवाई है।

प्रतिदिन 6 आरती होती हैं
नवरात्रि को ध्यान में रखते हुए मंदिर में 6 आरती की जाएगी। छह आरती में सुबह 4 बजे काकड़ा आरती, 9 बजे हलवा आरती, 10.30 बजे श्रृंगार आरती, 11.30 बजे नैवेद्य आरती इसके बाद शाम 7.15 बजे संध्या आरती और रात में 9:15 बजे श्यान आरती की जाएगी। मंदिर में 6 भुजाओं वाली माता की प्रतिमा स्थापित है। माता को मराठी परपंरा के अनुसार 16 हाथ की साड़ी पहनाई गई है। मंदिर समिति के कार्यकर्ता ने बताया कि पूरे साल माता के आभूषणों को बैंक के लॉकर में रखा जाता है। लेकिन नवरात्रि के एक दिन पहले गहनों को पुलिस की सुरक्षा में बैंक से मंदिर लाया जाता है। जिसके बाद माता का श्रृंगार किया जाता है। गहनों की सुरक्षा के लिए 15 दिन तक पुलिस बल मंदिर में तैनात रहेगा और शारद पूर्णीमा के बाद इन आभूषणों को दोबारा बैंक में जमा करवा दिया जाएगा। राजवंश परिवार की 28 वीं पीढ़ी यहां पर अभी मंदिर की सेवा कर रही है।

पंचमी से बढ़ती हैं भीड़
महाराष्ट्र और गुजरात के कई लोगों की कुलदेवी मां गढ़कालिका हैं। ऐसे में इन दोनों प्रदेशों से सैकड़ों की संख्या में लोग दर्शन करने मंदिर आते हैं। नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार हुई है, लेकिन मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या पंचमी से बढ़ गई है। भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर के मुख्य गेट पर नियंत्रण बनाने के लिए बैरिकेड्स भी लगाए गए हैं।

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