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कोरोना इफेक्ट:बिन गरबे पांडाल सूने, आखिरी समय में भी अनुमति मिले ताे खनके डांडिया, लगभग तीन कराेड़ का काराेबार प्रभावित

धार12 दिन पहले
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  • अनुमति मिले ताे चार महीने से ठप पड़े काराेबार काे मिल सकती है गति

काेराेना काल के नए नियमाें की शर्त पर शनिवार से शहर के 50 से ज्यादा जगहाें पर घट स्थापना हाे गई, मगर बगैर गरबाें के नवरात्र की पहली रात प्रांगण सुने रहे। दूसरी तरफ सरकार ने चुनावी रैली, सभाओं काे अनुमति दी है। जिले की बदनावर विधानसभा में हाे रहे उपचुनाव के तहत शुक्रवार काे हुई भाजपा और कांग्रेस की सभाओं में भीड़ उमड़ी।

अब सवाल है कि जब राजनीतिक सभाओं, रैलियाें की अनुमति है, सांस्कृतिक-धार्मिक आयाेजनाें काे छूट है ताे गरबाें पर राेक क्याें? शहर में पारंपरिक गरबे हाेते हैं वाे भी बड़े पैमाने पर नहीं। हालांकि गरबा समितियाें काे उम्मीद है कि सरकार ऐन माैके पर गाइडलाइन बदल दे। इसीलिए आयाेजकाें ने गरबे की भी पूरी तैयारी की है, ताकि अनुमति मिलने पर उन्हें तैयारी के लिए परेशान नहीं हाेना पड़े।

जून से बाजार खुलने के बाद माहौल ठंडा है। रक्षाबंधन ऐसे ही गुजर गया, व्यापारियाें काे नवरात्र और दिवाली से उम्मीद है। व्यापारियाें के मुताबिक हर साल नवरात्र में ड्रेस, डांडिया, ब्यूटी पार्लर, कपड़ा मिलाकर कराेड़ाें का काराेबार हाे जाता है। इसी राशि से व्यापारी दिवाली का माल भरते हैं। मगर गरबे नहीं हाेने से कराेड़ाें का नुकसान हुआ है।

शहर में 50 से अधिक गरबा पांडाल सजाए हैं

  • दस गरबा पांडाल प्रमुख माने जाते हैं, औसत 200 से 300 बालिकाएं प्रतिदिन करती हैं गरबा
  • लक्की चाैराहा बस स्टैंड, पाे चाैपाटी लालबाई मंदिर, हटवाड़ा, मायापुरी काॅलाेनी, विजय मंदिर, चाणक्यपुरी, धारेश्वर मंदिर, आश्रम, पाटीदार धर्मशाला सहित अन्य जगहाें पर विशेष रूप से गरबे किए जाते हैं।
  • अनुमति मिलने के बाद 6 फीट से अधिक की प्रतिमा पांडालाें में विराजित की गई है

गरबाें काे भी अनुमति दी जानी चाहिए : ठाकुर

सर्वधर्म चुनरी यात्रा के प्रवक्ता और हटवाड़ा गरबा उत्सव समिति के अजयसिंह ठाकुर के अनुसार गरबाें काे भी अनुमति दी जानी चाहिए। जब सब अनलाॅक है ताे गरबा लाॅक क्याें। ठाकुर के अनुसार सबसे छाेटे एक पांडाल में एक राउंड में कम से कम 30 बच्चियां हाेती हैं। इसमें 20 ताे ड्रेस में रहती ही हैं। शहर का सबसे पुराना गरबोत्सव सार्वजनिक नवदुर्गा उत्सव समिति हटवाड़ा सबसे बड़ा पांडाल है। यहां एक राउंड में 200 से 250 तक बालिकाएं हाेती हैं।

सभी ड्रेस और डांडिया सजाकर ही आती हैं। एक छाेटी बच्ची की गरबा ड्रेस कम से कम 300 रुपए की आती है। डांडिया की एक पेयर 20 से 30 रुपए तक आती है। ब्यूटी पार्लर, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, विशेष ड्रेस काेड़ और अन्य कपड़ाें काे मिलाकर औसत 3 कराेड़ रुपए का बाजार हाे जाता है, जाे इस बार नहीं हाेगा।

हर साल 15 से 20 दिन पहले ही नाै दिन की बुकिंग हाे जाती है :

सुरभि कला केंद्र संचालक सीमा बाैरासी ने बताया हर साल 15 से 20 दिन पहले ही नाै दिन की बुकिंग हाे जाती है, लेकिन अब कुछ नहीं। कपड़ा व्यापारी जितेंद्र आहूजा ने बताया नवरात्र के चाैथे दिन से बाजार गति पकड़ता है जाे अंत तक रहता है। ब्यूटी पार्लर संचालिका साेनाली कुमावत को 5 प्रतिशत ही व्यापार रहने की उम्मीद है। उन्हाेंने कहा अगर गरबाें काे अनुमति मिलती है ताे चार महीने से सुस्त पड़े काराेबार काे गति मिलेगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव दिवाली पर भी पड़ेगा।

गरबे की शासन से अनुमति नहीं है
काेराेना गाइड लाइन के तहत अभी तक गरबाें काे लेकर काेई निर्देश नहीं मिले हैं। फिलहाल गरबाें काे काेई अनुमति नहीं दी गई है। जैसे निर्देश हाेंगे आगे अवगत कराया जाएगा। दशहरा काे लेकर भी शासन ने जाे गाइड लाइन तैयार की है उसी अनुरूप आयाेजन कराया जाएगा। सभी गरबा पांडाल के आयाेजकाें काे भी बैठक लेकर अवगत कराया गया है।

-विशाखा देशमुख, सिटी मजिस्ट्रेट, धार

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