पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

दक्षिणी-पश्चिमी मानसून लाता है बारिश:गति नहीं मिलने से लगा ब्रेक, नतीजा- जुलाई के 11 दिन में सिर्फ 5 इंच वर्षा

धार13 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
धार. शहर का जलस्त्राेत बनाए रखने वाला मुंजसागर तालाब खाली पड़ा है। - Dainik Bhaskar
धार. शहर का जलस्त्राेत बनाए रखने वाला मुंजसागर तालाब खाली पड़ा है।
  • 6 साल पूर्व 2015 में भी 100 मिमी से कम हुई थी, कृषि वैज्ञानिक बोले- चार से पांच दिन में अच्छी बारिश की उम्मीद

हर साल दक्षिणी-पश्चिमी मानसून क्षेत्र में बारिश लाता है। इस साल गति नहीं मिलने से बीच में ब्रेक हाे गया। इसके चलते शहर व जिले में बारिश काेटा पूरा नहीं हाे पाया है। बारिश के 36 अाैर जुलाई के 21 दिन निकल गए, लेकिन अब तक अच्छी बारिश नहीं हुई। जिससे पेयजल स्राेताें का जलस्तर भी कम हाे गया है। शहर में बीते 11 दिनाें में महज 5 इंच बारिश हुई जबकि 10 दिन सूखे निकले। शहर में अब तक 272.1 मिमी बारिश हुई है। गत वर्ष इस अवधि तक 434 मिमी हाे चुकी थी। तेज बारिश के नहीं हाेने से साेयाबीन व मक्का की फसलाें पर कीटाें का खतरा बढ़ गया है। मंगलवार रात 34.3 मिमी बारिश दर्ज हुई।

2015 में हुई थी कम बारिश : जिले में बारिश की गणना 1 जून से की जाती है। वर्षाकाल की शुरुआत 15 जून से मानी जाती है। जून में मानसून दस्तक दे देता है इस बार ऐसा नहीं हुआ। मानसून कमजोर होने से जून के बाद जुलाई में भी कम बारिश हुई। बादल राेजाना छा रहे अभी भी जिले में जोरदार बारिश नहीं हुई है। जिले में कहीं-कहीं तेज बूंदाबांदी हो रही तो कहीं-कहीं खंड वर्षा। ऐसे में इस साल अल्प वर्षा की आशंका बन रही है। भूअभिलेख कार्यालय के अनुसार इतनी कम बारिश 6 साल पूर्व 2015 में भी हुई थी।

21 जुलाई की अवधि में उस समय 100 मिमी से भी कम बारिश दर्ज हुई थी। सावन बाद से बारिश अच्छी हाेने से काेटा पूरा हाे गया था। जिले की औसत बारिश 33 इंच है। अब तक 8.1 इंच ही हुई है। जाे गत वर्ष के मुकाबले कम है।

21 में से 11 दिन बारिश, बीते साल से 10 इंच कम
शहर में जुलाई के 21 दिन बीत चुके हैं 11 दिन में 5 इंच पानी बरसा है। पिछले साल जुलाई में अब तक 17 इंच पानी बरसा था। 6 जुलाई काे जरूर 25.7 मिमी बारिश हुई थी। इसके बाद 11 तारीख काे 10.6 मिमी, 12 काे 8.8 मिमी, 13 काे 4.8 मिमी, 14 काे 1.2 मिमी, 15 काे 2 व 16 काे 5 मिमी बारिश दर्ज हुई। 17 व 18 काे भी बारिश नहीं हुई। 19 काे 4 मिमी, 20 काे 36.1 मिमी व 21 काे 34.3 मिमी बारिश हुई। यानी कुल मिलाकर जुलाई में अब तक 10.7 इंच बारिश हुई जाे गत वर्ष से 10 इंच कम है।

पेयजल स्राेताें पर भी पड़ने लगा असर
बारिश की लंबी खेंच के चलते मुंजसागर तालाब, देवीसागर तालाब व पेयजल के प्रमुख स्राेताें दिलावरा डेम, नटनागरा व सीतापाट तालाब में पानी की आवक न के बराबर हुई है। दिलावरा डेम व सीतापाट तालाब में दाे माह का पानी बचा है। जबकि नयापुरा में एक माह का पानी और है। नपा के शहर में लगे 228 हैंडपंप में से 163 चल रहे हैं। 158 बाेरिंग में से 117 बाेरिंग चालू स्थिति में हैं। यानी 65 हैंडपंप व 41 बाेरिंग भी दम ताेड़ चुके हैं।

चार से पांच दिन में हाेगी अच्छी बारिश
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जीएस गाठिये ने बताया दक्षिणी पश्चिमी मानसून के गति नहीं मिलने से ब्रेक हाे गया। इसके चलते अच्छी बारिश नहीं हाेकर खंडवर्षा हाे रही। गुजरात-पश्चिमी क्षेत्र से जाे मानसून उठा था वह भी उत्तरी क्षेत्र में डायवर्ट हाे गया। इसलिए कम बारिश हुई। अब फिर से दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के सक्रिय हाेने से महाराष्ट्र में अच्छी बारिश हाे रही है। चार से पांच दिन में क्षेत्र में भी अच्छी बारिश हाेगी।

कम बारिश से फसलें हाे रहीं प्रभावित
जिले में इस साल 5 लाख 14 हजार 700 हेक्टेयर में खरीफ फसल लगी है। इसमें मुख्य रूप से साेयाबीन 2.50 लाख हेक्टेयर में है। इसके बाद कपास व मक्का लगा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकाें के अनुसार कम बारिश के चलते साेयाबीन में तना मक्खी, इल्ली, कामलिया कीट का प्रकाेप बढ़ गया है। नालछा, पीथमपुर, घाटाबिल्लाैद क्षेत्र में इसका प्रकाेप ज्यादा है। जबकि निमाड़ क्षेत्र में मक्का की फसल में फाल आर्मीवार्म की शिकायत आ रही है। कुछ दिनाें से स्टार्क राट तना गलन की बीमारी भी बढ़ी है। फसलाें की बढ़वार भी रुक सी गई है।

खबरें और भी हैं...