अब खेती भी महंगी:डीएपी-एनपीके की एक बाेरी 700 रुपए महंगी, दो लाख किसानों पर 148 कराेड़ रुपए का बढ़ेगा बोझ

धारएक वर्ष पहले
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खाद की जानकारी लेते किसान। - Dainik Bhaskar
खाद की जानकारी लेते किसान।
  • डीजल 93 रुपए पर पहुंचा, सोयाबीन के बीज की कीमत इस साल दोगुनी होकर 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल हो गई

खाद, डीजल और बीज की कीमताें में उछाल आने से किसानाें के लिए खेती करना महंगा हाे जाएगा। डीजल जहां 93 रुपए प्रति लीटर हाे गया है वहीं डीएपी और एनपीके की एक बाेरी पर अब किसानाें काे 700 रुपए अधिक चुकाने हाेंगे। वर्तमान में डीएपी की 1200 की बाेरी 1900 और एनपीके की 1100 की बाेरी 1800 रुपए की हाे गई है।

इधर जिले में 15 से 20 दिन के बाद साेयाबीन की बाेवनी शुरू हाे जाएगा। खेत तैयार करने के बाद शुरुआत में ही सुपर फास्फेट खाद की जरूरत हाेती है, लेकिन शासन के हाेम डिलीवरी और मशीन पर अंगूठा लगाने के नियम से विक्रेताओं के साथ ही किसानाें के लिए भी परेशानी खड़ी हाे गई है। जिले में इस बार करीब 3 लाख हेक्टेयर में साेयाबीन की बाेवनी का लक्ष्य कृषि विभाग ने रखा है, जबकि करीब दाे लाख किसान बाेवनी करेंगे।

जिले में 3 लाख हेक्टेयर यानी 741316 एकड़ में बोवनी होगी। प्रति एकड़ औसत खर्च दो हजार रुपए बढ़ने पर जिले के दो लाख किसानों पर 148 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। इधर खाद की बढ़ी कीमताें काे लेकर कांग्रेस आज राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर विराेध दर्ज कराएगी।

एक एकड़ में दो हजार रुपए का ज्यादा खर्च
तिरला के किसान अमाेल पाटीदार के अनुसार एक एकड़ में साेयाबीन की फसल में खाद पर 800 रुपए 30 किलाे, जुताई दाे बार में 1200 रुपए, बीज पर 1200 रुपए 30 किलाे, दवा पर 1000 रुपए, बुवाई 800, कटाई हार्वेस्टर से 1200 रुपए कुल 8000 रुपए का खर्च आता है। अब डीजल, खाद और बीज के दाम बढ़ने पर खाद 1200, जुताई 1600, बीज 2500, 30 किलाे, कटाई 1500, बाेवनी पर 1000 रुपए खर्च हाेंगे। कुल 10 हजार 300 रुपए तक खर्च बढ़ जाएगा। यानी 2 हजार रुपए अधिक लगेगा।

ऐसे समझें एक एकड़ में डीजल का गणित

  • हकाई में दाे बार में 8 लीटर
  • बाेवनी में एक घंटे के हिसाब चार लीटर
  • निंदाई में दाे बार में चार लीटर
  • दवाई छिड़काव 4 बार में 4 लीटर
  • साेयाबीन की फसल खेत से निकालने के लिए ट्रैक्टर में 5 लीटर कुल 25 लीटर डीजल एक एकड़ में लगेगा।
  • पहले डीजल 60 रुपए था, जाे कि वर्तमान में 93 रुपए प्रति लीटर हाे गया है।

भाजपा: कीमत कम करने सीएम से लगाई गुहार
हमनें सीएम काे अवगत कराया है, जल्द निर्णय हाेगा
हमने संगठन की ओर से सीएम शिवराजसिंह चाैहान काे अवगत कराया है कि खादी के कीमतें बहुत अधिक हैं। किसानाें काे आर्थिक बाेझ बढ़ेगा। इसे लेकर जल्द ही शासन स्तर पर निर्णय भी हाेने वाला है, इससे किसानाें काे राहत मिलेगी।
राजीव यादव, जिलाध्यक्ष भाजपा, धार

कांग्रेस: किसानों के हक में उठाएंगे पुरजोर आवाज
प्रदेश सरकार किसानाें काे बर्बाद करने पर तुली है
प्रदेश सरकार किसानाें के प्रति पूरी तरह से असंवेदनशील है। किसानाें काे बर्बाद करने पर तुली है। किसानाें काे खाद कम कीमत पर मिले इसे लेकर हम बुधवार काे प्रदेश के राज्यपाल के नाम से ज्ञापन देंगे। किसानाें के हक में कांग्रेस पूरजाेर आवाज उठाएगी।
बालमुकुंद गाैतम, जिलाध्यक्ष कांग्रेस, धार​​​​​​​

एक्सपर्ट व्यू
इसलिए बढ़ी कीमतें-आयात काेड 390 डाॅलर से बढ़कर 580-600 डाॅलर हाे गया

अंतरराष्ट्रीय कीमताें में उछाल आया है। गत वर्ष की तुलना में डेढ़ गुना वृद्धि हुई है। 390 डाॅलर आयात करने का काेड था वर्तमान में 580 से 600 डाॅलर चुकाने पड़ रहे हैं। 60 प्रतिशत आयातीत खाद पर निर्भर हैं। इसका कच्चा माल भी विदेश से ही आता है। उसकी कीमताें में भी उछाल आया है। इस कारण कीमताें में उछाल आया। भारत सरकार कीमताें में लगाम लगाती। या सरकार कीमताें में कंपनियाें काे एक बाेरी पर 520 की सब्सिडी दे।

यदि पुरानी कीमत में जाना है ताे 700 रुपए प्रति बाेरी सब्सिडी दे तो कुल 1220 हाे जाएगा। इससे कीमत पहले के बराबर आ जाएगी। राज्य सरकाराें ने भी केंद्र शासन काे सब्सिडी बढ़ाने के लिए लिखा है। बढ़ी कीमत वापस ली जाए। अप्रैल के पहले कीमतें तय नहीं हुई थी ताे मार्कफेड ने 70 हजार टन माल खरीद लिया था। जिस पैकेट पर जाे कीमत है उसी पर बेचा जाए। आज 1900 के रेट हाे गए हैं।
राकेश कुशवाह, रीजनल मैनेजर स्मार्ट कैम्म टेक्नालॉजीस लि. इंदाैर, एमपी व सीजी

​​​​​​​साेयाबीन बीज के दाम पिछले वर्ष की तुलना में दाे गुना हुए क्विंटल थे। इसका कारण यह है कि गत वर्ष बारिश के कारण साेयाबीन खराब हाे गई थी। इससे बीज किसानाें काे नहीं मिल पा रहा है।

हाेम डिलीवरी करना संभव नहीं
कृषि आदान विक्रेता संघ के जिला उपाध्यक्ष घनश्याम मेरवानी ने बताया कि हमें खाद पीओएस मशीन से यानी किसान का अंगूठा लगवाकर देना है, वह भी हाेम डिलीवरी से मात्र 50 बेग। यदि किसी के पास 50 एकड़ वाला खेत है ताे उसे 350 बाेरी लगेगी। ताे ऐसे में अंगूठा और कितने सदस्याें का लगवाएंगे। ग्रामीण क्षेत्राें में घर जाकर देना संभव नहीं है। हमें इतना मार्जिन ही नहीं मिलता। अभी सीजन का समय है। शासन के नियम से हमें और किसानाें काे परेशानी आ रही है।

जिले में इस बार करीब 3 लाख हेक्टेयर में साेयाबीन बाेवनी का रखा है लक्ष्य
जिले में गत वर्ष 2 लाख 85 हजार हेक्टेयर में साेयाबीन का रकबा था। जिले में कुल 5 लाख 14 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसमें तीन लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। कुल 3 लाख किसान पंजीकृत हैं, इनमें से करीब दाे लाख किसान साेयाबीन की बाेवनी कर सकते हैं। जून में मानसून की घाेषणा हाेने के बाद किसान बाेवनी करेंगे। 1 से 10 जून के बीच खेत तैयार हाेने की उम्मीद है।
डाॅ. केएस किराड़, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र धार​​​​​​​

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