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तैयारी:गणेशाेत्सव 10 से हाेगा शुरू; नृत्य करती प्रतिमा घर में न लाएं, बैठी मुद्रा में हो गणेशजी

धार21 दिन पहले
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गणेश चतुर्थी 10 सितंबर को मनाई जाएगी। 11 दिनी पर्व के तहत गणेशजी के विभिन्न रूपों की पूजा कर अन्नत चतुर्दशी के दिन विसर्जन किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य डाॅ. अशोक शास्त्री के मुताबिक भगवान गणेशजी का जन्म मध्यकाल में हुआ था इसलिए उनकी स्थापना इसी काल में होना चाहिए।

इस बार चतुर्थी को शुभ और मंगलकारी संयोग बन रहे है। गणेश स्थापना में भद्रा का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि भद्रा का निवास पाताल लोक में रहेगा। गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 7.48 से 10.51 बजे तक, दोपहर 11.59 से 1.02 बजे तक सर्वश्रेष्ठ रहेगा।

डाॅ. शास्त्री ने बताया गणेश भगवान को विघ्नहर्ता कहा जाता है। घर में सुख-समृद्धि और कष्टों को दूर करने के लिए लोग घरों में गणेशजी की प्रतिमा रखते हैं। इतना ही नहीं लोग गणेश प्रतिमा गिफ्ट में भी देते है। लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान श्री गणेश को घर में रखने के कुछ नियम होते हैं।

वास्तु के अनुसार अगर इन बातों को नजरअंदाज कर दिया जाए तो ये अशुभ भी हो सकता है। गणेश प्रतिमा को घर की किसी दीवार या कौने में बिना सोचे समझे नहीं रख सकते। घर में बाथरूम की दीवार पर, घर के बेडरूम में भी प्रतिमा लगाना शुभ नहीं होता।

हमेशा वाममुखी गणपति को ही लाने चाहिए
वास्तुशास्त्र के अनुसार भगवान गणेश की नृत्य करती हुई प्रतिमा घर में न लाए और न ही किसी को उपहार में दे। भगवान की नृत्य करती हुई प्रतिमा घर में लगाने से घर में कलह-क्लेश होता रहता है। डाॅ. शास्त्री ने बताया गणेशजी की प्रतिमा किसी लड़की की शादी में देना अशुभ होता है। क्याेंकि लक्ष्मी और गणेश हमेशा साथ होते है। ऐसे में घर की लड़की के साथ गणेशजी भी दे देंगे तो घर की समृद्धि भी उनके साथ चली जाती है।

प्रतिमा खरीद रहे हैं ताे यह भी देखे कि जिनकी सूंड बाईं ओर की तरफ हो हमेशा वाममुखी गणपति लाने चाहिए। क्योंकि दाईं ओर सूंड वाले गणपति की पूजा करने के लिए विशेष पूजा के नियमों का पालन करना पड़ता है। गणपति की बैठी हुई प्रतिमा काे भी शुभ माना जाता है।

गणेशजी से सीखे ये 5 गुण
डाॅ. शास्त्री ने बताया गणेशजी का प्रथम बड़ा गुण है धैर्यवान। किसी भी विपद स्थिति में धैर्य बनाए रखना ही जीवन में सफलता की कुंजी बनता है। दूसरा गुण हर परिस्थिति में खुश रहना। गणेशजी को हमेशा खुश रहने वाले देवता के तौर पर माना जाता है। तीसरा गुण है शांतचित्त रहना। चाैथा गुण है छोटे-बड़े में भेद न करना। भगवान गणेशजी के जीवन को गौर से देखे तो उन्होंने कभी छोटे-बड़े का भेद नहीं किया। पांचवा एक और महत्वपूर्ण गुण है विवेकशील रहना।

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