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  • Houses Made Of Mud, Sawdust And Lime For The Marie Tourists Of France, No Need Of AC Nor Heater To Be Installed In It

प्राकृतिक तकनीक:फ्रांस की मारी पर्यटकाें के लिए मिट्टी, चूरी व चूने से बना रहीं मकान, इसमें न एसी की जरूरत न हीटर लगाने की

सुनील तिवारी | मांडू7 महीने पहले
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  • मांडू के वार्ड क्र. 8 नीलकंठ राेड पर 2000 स्क्वेयर फीट में तैयार हाे रहा यह मकान
  • पर्यटकाें काे कराया जाएगा हाेम स्टे

पर्यटक नगरी मांडू में यू तो कई पुराने महलों को आज भी देखा जाता है पर संस्कृति और पर्यावरण प्रेमियों की चाह रहती है वैसे मकान का मिलना मुश्किल हो चुका है। आधुनिकता के साथ मकान बनाने के लिए सीमेंट, कैमिकलों का उपयोग हाे रहा है। जो पर्यावरण के साथ ही हमारी सेहत के लिए अनुकूल नहीं है।

ऐसे ही लुप्त हो रही प्राकृतिक तकनीक (मिट्टी, चुरी व चूने) का प्रयाेग कर मांडू के गाइड धीरज चौधरी और उनकी शिक्षिका पत्नी मारी चौधरी मकान तैयार कर रही है। प्राकृतिक सामग्री का प्रयाेग करने से इस मकान की खासियत यह है कि शारीरिक फायदों के साथ न तो एसी की जरूरत होगी न हीटर की। मकान पूरा बनते ही पर्यटकाें काे हाेम स्टे भी कराया जाएगा।

मारी ने बताया फ्रांस से आकर जबसे मांडू में बसी हूं हर जगह सीमेंट कांक्रीट के मकानों को बनते देखा। पति धीरज के साथ फैसला किया नीलकंठ राेड पर हम अपना आशियाना प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर बनाएंगे। जिससे न तो पर्यावरण को और नहीं प्रकृति को नुकसान पहुंचेगा। इसके लिए दोनों ने फ्रांस में छुट्टियों में जाकर कई नैचरल बिल्डिंग प्रोजेक्ट विजिट कर तकनीक को समझा।

यहां आकर आर्किटेक्ट सत्येंद्र भगत व अनंत नारायण से चर्चा कर लाल व काली मिट्टी का परीक्षण कराया। ईंट की मिट्टी से जुड़ाई करते हुए दीवार बनाई। प्लास्टर भी गेहूं के भूसे, चूरी व मिट्टी से ही किया। पानी का उपयोग ज्यादा हाेने वाली जगह चूने का जापानी प्लास्टर किया। जिसे टेडलेक्ट कहते हैं। जो पूरी तरह वाटरप्रूफ होता है।

आसपास के क्षेत्र में ऐसा पहला मकान होगा

2000 स्क्वेयर फीट में बन रहा यह मकान आसपास के क्षेत्र में ऐसा पहला मकान है। इसमें एक हाल, अमेरिकन किचन काॅमन, 4 बैडरूम, बालकनी, ऑफिस के साथ मकान के बीचों बीच एक छोटा सा गार्डन हाेकर उसमें बैठक व्यवस्था भी है। पर्यटकाें के लिए एक ओपन थिएटर भी बनाया गया है। पर्यटकाें काे हाेम स्टे के साथ आर्गेनिक खेती भी उगाई जा रही है। खुद ही कचरे से खाद भी बनाते है।

फ्रांस में भी इसी तकनीक से बनते हैं मकान

मारी ने बताया फ्रांस में माैसम ठंडा रहता है। गर्मी में भी 30 डिग्री तापमान रहता है। वहां बिना हीटर के लाेग रह नहीं सकते हैं। हीटर चलाने से बिजली खर्च भी करीब 40 हजार रु. आता है। ऐसे में अब वहां मिट्टी के साथ गेहूं, चावल के पुले से मकान बनाकर उसमें चिमनी लगाई जा रही है।

जिससे हीटर का खर्च भी कम किया जा रहा। कच्चे मकान में गर्मी में गर्मी व ठंड में ठंड कम लगती है। क्याेकि मिट्टी सांस छाेड़ती है। जबकि सीमेंट से गामा किरणें निकलने से दमे की शिकायत समेत जाेड़ाें के दर्द की परेशानी आती है। एसी चलाने से भी शरीर काे नुकसान पहुंचता है।

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