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कोरोना के संक्रमण से रहे दूर:दूसरी लहर में आश्रम की दीवार के उस पार से मिलवाया अपनाें काे, इसलिए 17 बुजुर्ग के पास नहीं पहुंचा वायरस

धार20 दिन पहले
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धार. इंदौर रोड स्थित रेडक्रॉस आश्रम के इन बुजुर्गाें काे दूसरी लहर छू भी नहीं सकी। - Dainik Bhaskar
धार. इंदौर रोड स्थित रेडक्रॉस आश्रम के इन बुजुर्गाें काे दूसरी लहर छू भी नहीं सकी।
  • आश्रम में 60 से लेकर 90 साल तक रह रहे बुजुर्ग, अभी भी जिले में निकल रहे हैं पाॅजिटिव

काेराेना की दूसरी भयावह लहर ने शहर की प्रत्येक काॅलाेनी और माेहल्लाें काे चपेट में ले लिया था। अभी भी जिले में दाे से चार दिन में मरीज सामने आ रहे हैं। काेराेना की चपेट में आने से जिले में अब तक 130 लाेगाें की मृत्यु हाे चुकी, जिसमें बुजुर्ग मृतकाें की संख्या सबसे ज्यादा है। हम अपने बड़ाें की सुरक्षा कैसे कर सकते हैं, इसका उदाहरण इंदाैर राेड पर स्थित रेडक्राॅस वृद्धाश्रम ने पेश किया है। आश्रम में 60 से लेकर 90 साल तक के हाई रिस्क वाले 17 बुजुर्ग हैं, जाे यहां के प्रयासाें से अब तक संक्रमण से दूर हैं।

शहर में दूसरी लहर के मरीज सामने नहीं आए थे, उससे पहले आश्रम के प्रबंधक महेश पांडे ने शासन की गाइड-लाइन का पालन करते हुए आश्रम में लाेगाें का आना और आश्रम से बुजुर्गाें का जाना प्रतिबंधित कर दिया था। प्रबंधक पांडे ने बताया, यह वायरस सबसे पहले बुजुर्गाें काे चपेट में ले रहा, इसलिए हमने बाहरी लाेगाें की इंट्री बंद कर दी। आश्रम में उन्हीं लाेगाें आने की इजाजत है, जिनके बुजुर्ग यहां पर रह रहे हैं।

उन्हें भी दाे गज की दूरी का पालन करवा रहे, जिससे की संक्रमण बुजुर्ग तक फैले नहीं। वर्तमान में दूसरी लहर से काफी राहत है, लेकिन जिले में अभी तक काेराेना का असर खत्म नहीं हुआ है। हालांकि अभी भी जिले में मरीज सामने आ रहे हैं। वहीं अब तीसरी लहर के आने की बात कही जा रही है, इसलिए हम आश्रम में सख्ती बढ़ा रहे हैं। बुजुर्गाें के लिए काेई भी खाने की सामग्री लाते हैं ताे हम इंकार कर देते हैं।

आश्रम में इस समय 17 बुजुर्ग रह रहे, इनमें 10 महिलाएं व 7 पुरुष शामिल हैं। सभी काे साेशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का बार-बार कहते, लेकिन बुजुर्ग कम समझते हैं। भाेजन के समय दूर-दूर बैठकर भाेजन करते हैं। समय-समय पर हाॅल में सैनिटाइजर स्प्रे भी किया जा रहा है।

एक सप्ताह बाद उपयाेग करते हैं किराना सामान
आश्रम के संचालक पांडे ने बताया, काेराेना की दूसरी लहर से पहले हम बाजार से आने वाला किराने का सामान रसाेई गृह में रखते हैं। उस सामान काे एक सप्ताह बाद ही हाथ लगाते, तब तक अगर बाहर से वायरस भी आ गया ताे वह खत्म हाे जाता है। यह प्रक्रिया अब हम पूरे साल करेंगे, क्याेंकि काेराेना खत्म हाेने वाला नहीं है। किराने का सामान खत्म हाेने के एक सप्ताह पहले लेकर आ जाते हैं। इसके अलावा संगठन और समितियाें के द्वारा पका भाेजन भेजा जाता था, उसे भी महामारी के डर की वजह से लेना बंद कर दिया है।

बुजुर्गाें काे नहीं दे रहे छुट्टी, आश्रम में रहने की सलाह
कुछ बुजुर्गाें काे लेने के लिए उनके परिवार के सदस्य आते हैं, जिन्हें हम छुट्टी नहीं दे रहे हैं। घर जाकर बुजुर्ग कहीं संक्रमण लेकर नहीं आ जाए। दूसरी लहर के दाैरान बुजुर्गाें से मिलने के लिए उनके परिवार के सदस्य आते थे ताे हम उन्हे गेट के बाहर से बात करवाते थे, अंदर आने की इजाजत नहीं थी। अब संक्रमण कम हाे गया ताे मिलने वाले अंदर आ जाते हैं।

बाल मानसिक विकलांग विद्यालय में भी बच्चा और स्टाॅफ नहीं हुआ संक्रमित
वृद्धाश्रम परिसर में ही बाल मानसिक विकलांग विद्यालय भी है, जिसमंे 6 बच्चे रहते हैं। इन बच्चाें का ध्यान रखने के लिए स्टाॅफ लगा रहता है। स्टाॅफ में भी किसी काे काेराेना की दूसरी लहर छू नहीं सकी है। स्कूल प्रबंधिका प्रमीला शर्मा ने बताया, संक्रमण आया तभी से हमने बच्चाें का ज्यादा ध्यान रखना शुरू कर दिया है। दूसरी लहर में हम लाेगाें ने भी आश्रम परिसर से बाहर जाना बंद कर दिया था, जिसका नतीजा है कि हमारे बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

मैं बच्चाें के अलावा बुजुर्गाें काे थाेड़ी परेशानी हाेने पर उनका भी ध्यान रखती हूं। दूसरी लहर के दाैरान बच्चाें के साथ ही बुजुर्गाें काे हल्दी वाला दूध प्रतिदिन पीने के लिए दिया। हल्दी से राेग-प्रतिराेधक की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा बुजुर्ग किशन दादा काे कुछ दिन पहले परेशानी आने पर साैंठ, अजवाइन, काली मिर्ची पीसकर शहद में चटाई थी, जिससे वह सही हाे गए।

बुजुर्ग बोले - थोड़े भी बीमार होते हैं तो हमें तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल ले जाता है
आश्रम में रहने वाले 65 साल के किशनलाल ने बताया, वायरस की वजह से हमें बाहर नहीं जाने दिया, जिससे हम बच सके। थाेड़े भी बीमार हाेते हैं ताे हमें तत्काल एंबुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाया जाता है। अभी तक किसी काे संक्रमण नहीं लगा है। साबुन से बार-बार हाथ भी धुलवाते हैं। -आश्रम में 4 साल से रह रही 75 साल की सुंदरबाई ने बताया, आश्रम में हमारा बहुत ध्यान रखा जाता है। समय पर दवाइयां उपलब्ध करवाने के साथ ही बीमार हाेने पर डाॅक्टर काे दिखाते हैं। हम सभी महिलाएं वायरस से सुरक्षित हैं।

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