गीता जयंती:मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती पर 50 से ज्यादा शादियां

धारएक महीने पहले
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मोक्ष प्रदान करने वाली मोक्षदा एकादशी मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन अमृत सिद्धि योग की युक्ति बन रही है, जो अनन्य पुण्य प्रदान करने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत के प्रभाव से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए और पितरों के निमित्त दान-पूण्य करना चाहिए। इससे व्रतियों के सभी पापों का नाश होता है और उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस दिन गीता जयंती भी है, इसलिए इसका ओर महत्व बढ़ जाता है। गीताजी की पूजा करने के साथ पाठ करना या सुनना चाहिए। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। मोक्षदा एकादशी का अर्थ है मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी। यह एकादशी 13 दिसंबर की देर रात 11.29 बजे से शुरू हो जाएगी जो 14 दिसंबर को देर रात 12.48 बजे तक विद्यमान रहेगी। मंगलवार सुबह 7.10 से मध्य रात्रि तक अमृत सिद्धि योग रहेगा। मोक्षदा एकादशी के अमृत सिद्धि की युक्ति के तहत किया गया दान अनन्य पापों से मुक्ति दिलाकर पुण्य प्रदान करने वाला है तथा मन की इच्छाओं की पूर्ति हेतु पुण्य प्रदान करने वाला रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. राघवेंद्र पंडित ने बताया कि इस दिन गीता जयंती भी रहेगी, ऐसे में मोक्षदा एकादशी के साथ गीता जयंती व अमृत सिद्धि योग होने से विशेष महत्व रहेगा। मोक्षदा एकादशी करने से पितरों का मोक्ष होता है। इसलिए पितरों के मोक्ष के लिए एकादशी का व्रत करना चाहिए। पं. जाेशी ने बताया कि वैसे तो विवाह के लिए 13 दिसंबर को अंतिम शुभ मुहूर्त है, लेकिन मंगलवार का मोक्षदा एकादशी व गीता जयंती होने के कारण भी शादियों के लिए मुहूर्त रहेगा। दो दिन शहर में ही 50 से ज्यादा शादियां है। उसके बाद 16 दिसंबर से मलमास लग जाएगा, जिससे एक माह तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे। इसलिए दो दिन शादियां ज्यादा रहेगी, क्योंकि कोरोना संक्रमण के कारण एक माह बाद क्या स्थिति बनती है। इसलिए लोग इन दो दिनों में लग्न करना चाहते है।

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