साेमवती अमावस्या:कोटेश्वर मार्ग पर पुलिस ने राेका, श्रद्धालुओं ने बाघनी नदी पुल के समीप शुरू कर दिया स्नान

निसरपुर8 महीने पहले
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  • राेक के बाद भी नहीं माने लाेग, बैक वाटर कम होने से किनारों पर किया स्नान
  • धार जिले के अलावा आलीराजपुर, झाबुआ जिले से भी सैकड़ों लोग स्नान करने पहुंचे

साेमवार काे साेमवती अमावस्या मनाई गई। इस दिन नदी में स्नान, दान और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व माना जाता है। काेराेना संक्रमण के चलते प्रशासन ने नर्मदा स्नान पर राेक लगा दी थी। निसरपुर-कोटेश्वर मार्ग पर बैरिकैड्स लगा कर पुलिस ने लोगों को कोटेश्वर तीर्थ स्नान पर जाने से रोक दिया। इसके बाद लोगों ने डूब के गांव निसरपुर में उरी बाघनी नदी के पुल के समीप नर्मदा के बेक वाटर में स्नान करना शुरू कर दिया। जहां सुबह 9 बजे तक तो दुकानें लग गई। धार जिले के अलावा आलीराजपुर, झाबुआ जिले से भी सैकड़ों लोग बाइक व चार पहिया वाहनाें से निसरपुर के पुराने पुल पर स्नान करने पहुंचे। जहां सुबह से लेकर शाम तक बिना रोक टोक के स्नान चलता रहा। स्थानीय प्रशासन ने रविवार देर रात आदेश जारी कर नर्मदा किनारे के तीर्थ स्थलों पर स्नान की रोक भले ही लगा दी परंतु पर्व के चलते लगभग 10 हजार लोगों ने डूब के गांव निसरपुर के समीप, चंदनखेड़ी के समीप नर्मदा स्नान किया। अधिकांश श्रद्धालुओं काे प्रशासन के आदेश की जानकारी भी नहीं हाेने से अलसुबह से पहुंच गए।

श्रद्धालुओं ने घाट के अभाव में कीचड़ में किया स्नान
अलसुबह से श्रद्धालु नर्मदा तट सेमल्दा पहुंचने लगे। क्योंकि सोमवार सुबह 8 बजे तक ही अमावस्या थी। नवरात्रि के साथ ही गणगौर पर्व की शुरुआत भी हो चुकी है। गणगौर पर्व पर झाड़ खेलते है (माता की उपासना) वे भी नर्मदा स्नान कर किनारे पर ही झाड़ खेलने की शुरुआत करते है। इसलिए इस अमावस्या का अधिक महत्व होता है। नर्मदा में बैक वाटर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। किनारों पर गाद भी जमी हुई है फिर भी स्नान करने वालों की आस्था प्रभावित नहीं हुई। बड़ी संख्या में लोगाें ने स्नान किया। पितरों के श्राद्ध कर्म करने के लिए भी लाेग पहुंचे।

बेक वाटर में किया स्नान
अमावस्या व गणगोरी (भूतड़ी) अमावस्या पर नर्मदा किनारे कोटेश्वर तीर्थ व मेघनाथ घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। यहां स्नान के लिए प्रशासन ने प्रतिबंध लगाया था बावजूद श्रद्धालु नहीं माने। गणगौर माता के झाड़ (जिनके शरीर में माता आती है) उन्होंने भी नर्मदा के बैक वाटर में स्नान किया। मेघनाथ घाट जाने वाले श्रद्धालुओं ने पिपरीपुरा, चंदनखेड़ी, धरमराय आदि जगहों पर जाकर नर्मदा स्नान किए।

कोरोना के खतरों पर भारी पड़ी आस्था
कोरोना संक्रमण चलते अमावस्या पर नर्मदा स्नान के लिए घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही नर्मदा स्नान शुरू हो गया। श्रद्धालुअाें ने स्नान के बाद मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान ज्यादातर श्रद्धालु बिना मास्क के दिखाई दिए। कोविड गाइडलाइन का पालन भी नहीं किया गया। पुलिस ने श्रद्धालुओं से स्नान नहीं करते हुए कोरोना गाइडलाइन का पालन करने का आह्वान किया था। इसका इसका काेई असर यहां नहीं दिखाई दिया।

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