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'जुगाड़' से बचा रहे जिन्दगी:एम्बुलेंस का खर्च 10 हजार देख अजीजभाई ने बना दी बाइक एम्बुलेंस, सात दिन में 8 मरीजों को मुफ्त में पहुंचाया अस्पताल

धार6 महीने पहले
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इस एम्बुलेंस काे बाइक से टाेचन कर मरीज काे अस्पताल पहुंचा सकते हैं। - Dainik Bhaskar
इस एम्बुलेंस काे बाइक से टाेचन कर मरीज काे अस्पताल पहुंचा सकते हैं।
  • इंटरनेट से सीखा सुपर बाइक बनाने का तरीका, 30 हजार में बना दी जीवन बचाने की गाड़ी

एम्बुलेंस संचालकाें ने आपदा में अवसर खाेजना शुरू किया ताे वसंत विहार काॅलाेनी निवासी बीई मैकेनिकल अजीज खान ने बाइक एम्बुलेंस बनाकर पीड़िताें के लिए फ्री उपलब्ध करा रहे हैं। इस एम्बुलेंस काे बाइक से टाेचन कर मरीज काे अस्पताल पहुंचा सकते हैं। इसमें दवाइयाें से लेकर 25 किलाे का ऑक्सीजन सिलेंडर लगा है। इसे ले जाने वालों काे ऑक्सीजन सिलेंडर में फिर से गैस भरवाना हाेती है। इससे अब तक आठ लाेगों काे नई जिंदगी मिली है।

मरीज के साथ दाे व्यक्ति भी बैठ सकते हैं, 25 किलाे का ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगा है

अजीज (बीई मैकेनिकल) है।
अजीज (बीई मैकेनिकल) है।

वर्ष 2006 से पहले वे शहर के पाॅलीटेक्निक काॅलेज में व्याख्याता थे। 2006 में उन्होंने खुद का उद्याेग डाला। अजीज बताते हैं कि सुविधाओं के अभाव में जानें जा रही है। इसी बीच उनके पास एक एम्बुलेंस का बिल आया, जिसमें मरीज काे ले जाने का शुल्क दस हजार रु. था।

तब उन्हें बाइक एम्बुलेंस बनाने ख्याल आया। अजीज ने पहले इंटरनेट से एम्बुलेंस में हाेने वाली सुविधाओं की जानकारी जुटाई। फिर एम्बुलेंस बनाना शुरू किया। इसमें दाे शाॅकप, रबर के पहिए, फेब्रिकेशन सहित उसकी चाैड़ाई इतनी रखी कि मरीज के साथ दाे लाेग और बैठ सकें। एम्बुलेंस निर्माण की लागत 30 हजार रु. आई। दाे दिन में बाइक एम्बुलेंस तैयार हाे

कर्मचारी बंशी के भाई अनिल की जान बची
बाइक एम्बुलेंस से अजीज की फैक्टरी के कर्मचारी बंशी के भाई अनिल की जान बची है। अजीज बताते हैं सलकनपुर के बंशी के भाई की तबीयत सीरियस होने पर बंशी बाइक से एम्बुलेंस टाेचन कर उसे अस्पताल ले गए। समय पर इलाज मिलने से उनकी हालत खतरे से बाहर है। इससे सात और लाेगाे जान बचाई गई है। अजीज कहते हैं कि ग्राम पंचायताें में ऐसी एंबुलेंस बनवाकर रखी जाए तो कई लोगों की जान बच सकती है।

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