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श्मशान घाट पर शिक्षकों की ड्यूटी निरस्त:नर्मदा के घाटों पर बाहरी शवों का नहीं होने देंगे अंतिम संस्कार; बाद में कलेक्टर ने आदेश वापस लिया

धार8 दिन पहले
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नर्मदा घाट होशंगाबाद पर अंतिम संस्कार के बाद पड़े पीपीई किट और अन्य सामान। - Dainik Bhaskar
नर्मदा घाट होशंगाबाद पर अंतिम संस्कार के बाद पड़े पीपीई किट और अन्य सामान।

नर्मदा के घाटों पर बाहर से आने वाले शवों का अंतिम संस्कार नहीं होने देने के लिए धार जिले में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इससे शिक्षक परेशान हैं। समस्या यह है कि वह अपनी पीड़ा किसी को बता भी नहीं पा रहे हैं। विरोध के बाद कंटेनमेंट एरिया और खलघाट के मुक्तिधाम पर शिक्षकाें की ड्यूटी लगाने संबंधी आदेश को कलेक्टर आलोक कुमार सिंह ने निरस्त कर दिया। उनका कहना है कि अब ऐसे जगहों पर शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी।

कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए खलघाट और धामनोद के शवों को ही खलघाट श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन की अनुमति रहेगी। इसके अतिरिक्त अन्य शहर या गांव से आने वाले शवों का अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन प्रतिबंधित रहेगा।

इस काम पर सतत निगरानी रखने के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी धरमपुरी के आठ शिक्षकों को तैनात किया गया था। विकासखंड शिक्षा अधिकारी शिवपालसिंह बैस को नोडल अधिकारी बनाया गया।

शिक्षक नटवर यादव, कमल निरगुड़े, प्रवीण शर्मा, पवन मेरेंट, महेश सूर्यवंशी, विजय शर्मा, सज्जाद खान, जयसिंह चौहान को तैनात किया गया था। सुबह 6 बजे से लेकर रात 8 बजे तक बारी-बारी से ड्यूटी लगाई गई।

नर्मदा घाटों पर हो रही दिक्कत
दरअसल, कोरोना काल में नर्मदा घाटों पर अंतिम संस्कार करने से संक्रमण फैलने का खतरा है। इसके अलावा अंतिम संस्कार के बाद परिवार के लोग पीपीई किट समेत अन्य सामान भी घाटों पर भी छोड़कर जा रह है।

ज्ञापन देकर दर्ज कराया विरोध
ट्रायबल वेलफेयर एसोसिएशन ने विरोध किया। सोमवार को संस्था की तरफ से एक ज्ञापन कलेक्टर को दिया गया है। इसमें मांग की गई है कि शिक्षकों की ड्यूटी ऐसी जगह पर लगाई तो पहले वहां ड्यूटी करने वाले शिक्षको को कोरोना योद्धा घोषित किया जाए, ताकि उनके साथ किसी प्रकार की कोई अनहोनी होती है तो उन्हें भी शासन की ओर से जो सहायता राशि हो वह दी जाए।
ट्रायबल एसोसिएशन के शैलेंद्र मालवीय ने कहा कि शिक्षक ड्यूटी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन शासन की तरफ से उनकी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया गया है। इस तरह से उनकी ड्यूटी वहां लगाना गलत है। उन्हें कोरोना योद्धा माना जाना चाहिए।

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