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वन अधिकार अधिनियम:वन अधिकार के 2720 दावेे, इनमें से 76 स्वीकृत ज्यादातर जिला स्तर पर आने के पहले हुए अमान्य

झाबुआएक महीने पहले
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  • 2019 के पहले 1485 आदिवासियों को 1186 हेक्टेयर जमीन दी जा चुकी, सामुदायिक अधिकार में 26974 हेक्टेयर जमीन दी

(अहद खान) शनिवार को वन अधिकार अधिनियम के तहत जिले के आदिवासियों को वनभूमि पर अधिकार पत्र सौंपे जाएंगे। ये वो दावे हैं जो अधिनियम लागू होने वाले साल 2008 से लेकर 2019 के बीच निरस्त किए गए थे। इनके लिए फिर से आवेदन बुलवाए गए। जिले में इस तरह के 2720 व्यक्तिगत दावे मिले। लेकिन इनमें से सिर्फ 76 को ही अधिकार पत्र देने के लिए स्वीकृत किया गया। इन दावों में से ज्यादातर ग्राम स्तरीय और उपखंड स्तरीय समिति ने ही निरस्त कर दिए।

जिला स्तर पर 627 प्रकरण पहुंचे थे। बाद में 24 और भेजे गए। दावा है, इनमें से 60 को ही निरस्त किया गया। बाकी बचे प्रकरणों को अपील के लिए रखा गया है। 2019 के पहले जिले में 1485 आदिवासियों को 1186 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन के अधिकार पत्र दिए जा चुके हैं। नए स्वीकृत प्रकरणों में लगभग 70 हेक्टेयर जमीन और दी जाएगी।

कुल लगभग 1250 हेक्टेयर जमीन के अधिकार पत्र दिए गए। ये जिले की वनभूमि का 5.6 प्रतिशत है। सामुदायिक अधिकार के रूप में 26974 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन दी जा चुकी है। ये जिले की कुल भूमि का 7.49 प्रतिशत है। इतनी कम संख्या में नए दावे स्वीकृत होने पर राजनीति होने की भी संभावना है। दरअसल राजनीतिक दल और आदिवासी संगठन ज्यादा से ज्यादा अधिकार पत्र देने की मांग करते रहे हैं।

नियम ये है

वन अधिकार अधिनियम में वनभूमि पर काबिज आदिवासी परिवारों को रहने, खेती करने के लिए जमीन का अधिकार दिया जाता है। इसके अलावा सामुदायिक रूप से चरनोई या दूसरे प्रयोजन के लिए अधिकार दिया जाता है। नियम ये है कि जो व्यक्ति 13 दिसंबर 2005 से पहले से संबंधित जमीन पर काबिज हो, उसे अधिकार पत्र दिया जाना है। इसके लिए प्रमाण देना होता है। वन विभाग की कार्रवाई, चालान, नोटिस, कोर्ट प्रकरण या दूसरा कोई दस्तावेज जो इस तारीख के पहले व्यक्ति या उसके पूर्वजों का कब्जा साबित करता हो।

प्रक्रिया ये है

अधिकार पत्र के लिए पहले ग्राम स्तरीय समिति पर आवेदन देना होता है। ये वन मित्र पोर्टल पर अपलोड होते हैं। ग्राम स्तरीय समिति अनुशंसा करके उपखंड समिति को भेजती है। इसमें सीईओ जनपद, एसडीओ फॉरेस्ट, एसडीएम परीक्षण करते हैं। इसके बाद जिला स्तरीय समिति के पास भेजा जाता है। इसमें कलेक्टर अध्यक्ष, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सचिव और डीएफओ सदस्य होते हैं। यहां निर्णय के बाद अपील का समय दिया जाता है। अभी ज्यादातर मामले इसी अपील के समय में हैं।

लेकिन सब दावे सच नही पट्‌टाें के लिए इस बार वन कटाई दोगुनी हुई
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में 1 जनवरी से 30 जून तक 6 महीने में अवैध कटाई के 91 प्रकरण दर्ज किए गए और अतिक्रमण के 14 मामले बने। अतिक्रमण केे मामलों में कब्जे वालों को बेदखल किया जा चुका है। साल 2019 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच अवैध कटाई के 90 और अतिक्रमण के 12 मामले हुए थे। 2018 में ये संख्या 59 और 1 थी।

2840 निरस्त हुए थे, 120 के दावे नहीं आए
2008 से 2019 तक कुल 2840 दावे निरस्त किए गए थे। इनमें से ही नए पट्‌टे देना थे। इसके बाद 120 के आवेदन फिर से नहीं आए। संभवत: दावेदार नहीं रहे या उनके वैध वारिस नहीं थे। 2720 दावे मिले। इनमें से 2241 ग्राम समिति से उपखंड स्तर पर पहुंचे। उपखंड से 627 दावे जिला स्तर पर भेजे गए। इनमें से 76 को मान्य किया गया।

आंकड़ों में समझें
जिले का कुल क्षेत्रफल- 3.60 लाख हेक्टेयर
इसमें से वनभूमि- 22167 हेक्टेयर (इंडिया स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट 2019 के मुताबिक)
पूर्व में दिए गए व्यक्तिगत अधिकार- 1485 लोगाें को 1186.165 हेक्टेयर
पूर्व में दिए गए सामुदायिक अधिकार- 4589 समूहों को 26974.454 हेक्टेयर

सब निरस्त नहीं हैं
सारे प्रकरण निरस्त नहीं किए गए हैं। सबमें अपील का समय है। उपखंड स्तर पर भी और जिला स्तर पर भी। सिर्फ 60 दावे निरस्त हुए हैं। कुछ लोगों ने राजस्व की जमीन के आवेदन भी दे दिए थे। अपील में दावेदार दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रशांत आर्य, सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग

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