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बर्ड फ्लू की आहट:मदरानी में 6 मोर मृत मिले, एक के सैंपल जांच के लिए भेजे, बाकी 5 को दफनाया

झाबुआ2 महीने पहले
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मदरानी में मोरों के शवों का पंचनामा बनाकर ग्रामीणों से जानकारी ली गई। - Dainik Bhaskar
मदरानी में मोरों के शवों का पंचनामा बनाकर ग्रामीणों से जानकारी ली गई।
  • ग्रामीणों ने दी मोरों की मौत की खबर, झाबुआ से पहुंची पशुपालन विभाग की टीम
  • अफसर बोले- जांच के बाद ही मौत का असली कारण पता चलेगा

जिले के थांदला क्षेत्र के गांव मदरानी में रविवार सुबह 6 मोरों के मृत होने की खबर मिली। गांव के लोगों ने वनक्षेत्र के पास इन मृत मोरों को देखा। खबर मिलने पर झाबुआ और थांदला से वन विभाग, राजस्व और पशुपालन विभाग की टीमें पहुंची। मृत मोरों में 3 नर और 3 मादा हैं। एक शव को जांच के लिए रखा गया और बाकी 5 को जंगल में गहरा गड्‌ढा खोदकर दफना दिया।

अफसरों का कहना है, शव की जांच के बाद ही मौत का असली कारण पता चल सकेगा। इसके पहले से एक कौए के सैंपल भी भेज रखे हैं, उसकी रिपोर्ट नहीं आई। वो झाबुआ के डीआरपी लाइन में मृत मिला था। प्रदेश में बर्ड फ्लू के मामले आने के बाद से जिले में पहली बार एकसाथ इतने पक्षियाें की मौत हुई। जहां ये मृत मिले, उस क्षेत्र में काफी संख्या में मोर रहते हैं। रविवार को मृत मिले मोर मदरानी गांव की सीमा में दिखाई दिए। अफसरों तक खबर मीडिया के माध्यम से पहुंची। टीम ने दोपहर में पहुंचकर पंचनामा बनाया और आसपास के लोगों के बयान लिए।

जानिए बर्ड फ्लू के बारे में, लंबे समय तक शरीर में रहता है वायरस

  • इसे एवियन इनफ्लुएंजा वायरस भी कहते हैं। बर्ड फ्लू के सबसे कॉमन वायरस का नाम H5N1 है। यह एक खतरनाक वायरस है जो चिड़ियों के साथ इंसान और दूसरे जानवरों को भी संक्रमित कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, H5N1 को 1997 में खोजा गया था। इस वायरस से संक्रमित होने पर 60% मामलों में मौत हो जाती है।
  • बर्ड फ्लू के कई वायरस हैं, लेकिन H5N1 पहला वायरस है जिसने इंसान को संक्रमित किया। 1997 में वायरस संक्रमित मुर्गियों के जरिए इंसान तक फैला था। 2003 से यह वायरस चीन समेत एशिया, यूरोप और अफ्रीका में फैलना शुरू हुआ था। वायरस आमतौर पर पानी में रहने वाली बत्तखों में पाया जाता है, लेकिन मुर्गियों में यो तेजी से फैलता है। संक्रमित मुर्गियों या इसके मल-मूत्र के संपर्क में आने से यह वायरस इंसानों में फैलता है।
  • संक्रमण होने पर यह वायरस शरीर में लंबे समय तक रहता है। पक्षियों में संक्रमण होने पर वायरस उसमें 10 दिन तक रहता है। यह मल और लार के रूप से बाहर निकलता रहता है। इसे छूने या संपर्क में आने पर संक्रमण हो सकता है।
  • सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने संक्रमित इंसान में वायरस का पता लगाने के लिए इनफ्लुएंजा A/H5 वायरस रियल टाइम RT-PCR टेस्ट तैयार किया है। रिपोर्ट आने में 4 घंटे लगते हैं। हालांकि यह जांच दुनियाभर में उपलब्ध नहीं है। आमतौर पर डॉक्टर वायरस की जांच के लिए मरीज के व्हाइट ब्लड सेल्स और नाक से नमूना लेते हैं। चेस्ट एक्स-रे करते हैं और सांस लेने पर निकलने वाली आवाज भी जांचते हैं।
  • मींडल में कबूतर ने दम ताेड़ा : जिले में जनवरी महीने में अचानक 11 से ज्यादा पक्षियों की मौत हो चुकी है। रविवार सुबह मींडल में पेट्रोल पम्प परिसर में एक कबूतर अचानक गिरा और तड़पकर दम तोड़ दिया। इसके पहले झाबुआ में दो कबूतर, एक कौआ, राणापुर, थांदला और पारा में एक-एक कबूतर की मौत हो चुकी है। अब रविवार को सबसे बड़ी घटना घटी।

प्रोटोकॉल के तहत डिस्पोज किए मोरों के शव
6 मोरों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें से 3 नर और 3 मादा हैं। वन विभाग की टीम के साथ पशुपालन विभाग के डॉक्टर्स भी गए हैं। प्रोटोकॉल के मुताबिक शवों को डिस्पोज किया गया। एक शव के सैंपल की जांच होगी, तब तक मौत का कारण सही तौर पर नहीं बताया जा सकता।
एमएल हरित, डीएफओ, झाबुआ

जांच रिपोर्ट आने पर पता चलेगा बर्ड फ्लू है या नहीं
हमारी टीम भी गांव में गई है। एक शव को सुरक्षित रखा गया है। इसके सैंपल जांच के लिए लैबोरेटरी भेजे जाएंगे। बर्ड फ्लू है या नहीं, जांच रिपोर्ट आने तक नहीं कह सकते।
विल्सन डावर, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग

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