पोषण आहार:लॉकडाउन में आंगनवाड़ियां बंद थी फिर भी 8 माह में 410 अति कुपोषित बच्चों का बढ़ गया वजन

झाबुआएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • पहले समूह खाना बनाकर देते थे, उसकी बजाय घरों तक पैकेट भेजना भी कारगर साबित हुआ

आंगनवाड़ियां 17 मार्च को बंद हो गई। तब पहले तक आंगनवाड़ियों में बच्चों को और गर्भवती महिलाओं को समूह पोषण आहार बनाकर देते थे। आंगनवाड़ी बंद हुई तो भोजन की बजाय पोषण आहार के पैकेट देने की व्यवस्था की गई। विभागीय आंकड़ें माने जाएं तो ये व्यवस्था भी कारगर रही। मार्च से अक्टूबर तक 8 महीने में जिले में अति कुपाेषित बच्चों की संख्या 2178 से कम होकर 1768 पर आ गई। यानी 410 बच्चों का वजन बढ़ गया। आंगनवाड़ियां लॉकडाउन में बंद कर दी गई थी जो अब तक बंद हैं। ऐसे में गर्भवती माताओं और 6 माह से 3 साल के बच्चों को हलुआ, लड्‌डू, खिचड़ी के रेडीमेट पैकेट दिए जाने लगे। 3 से 6 साल के बच्चों के लिए सत्तू के पैकेट उपलब्ध कराए गए। जिले में तकरीबन 25 हजार बच्चों को पैकट दिए गए। बच्चों के वजन में ये सुधार दस्तक अभियान और आंचल अभियान को मिलाकर हुए सुधार के लगभग बराबर है। दस्तक अभियान में स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कुपाेषित बच्चे ढूंढकर उनका इलाज करना था और आंचल अभियान में अफसरों को बच्चों की सेहत की जिम्मेदारी दी गई थी।

पहले ये देते थे मीनू में

  • नाश्ता- सोमवार व शनिवार- खिचड़ी, मंगलवार वशुक्रवार को नमकीन दलिया, बुधवार-गुरुवार को मीठा दलिया।
  • भोजन - सोमवार को दाल-रोटी, मंगलवार को खीर-पुड़ी, बुधवार को दाल-रोटी और सब्जी, गुरुवार को दाल-चावल, शुक्रवार को दाल-रोटी और शनिवार काे पकोड़े वाली कड़ी।

बदलाव कितना

दस्तक और आंचल में 856 बच्चे ठीक हुए थे

पिछले साल जून से अगस्त तक दस्तक अभियान चलाया गया था। इसमें गांवों में कुपोषित बच्चों को ढूंढकर उनका इलाज करना था। इसके बाद से आंचल अभियान चल रहा है। मई में अति कुपोषित बच्चे 3034 थे और फरवरी में 2178 बचे। तब दो अभियान चलने के 9 महीने में अति कुपोषितों की संख्या में 856 की कमी आई थी।

पोषण पुनर्वास केंद्र अब भी खाली
कुपोषण अभी भी है। जितने भी बच्चे हैं उन्हें उपचार की जरूरत है और कइयों को खून की। इसके बावजूद पोषण पुनर्वास केंद्र अभी भी खाली है। कलेक्टर के निर्देश के बावजूद। जिला अस्पताल के केंद्र में अभी सिर्फ 5 बच्चे भर्ती हैं, जबकि क्षमता 20 की है। जिले में 6 पोषण पुनर्वास केंद्र हैं। इनमें से दो 20 की क्षमता वाले और 4 केंद्र 10-10 की क्षमता के हैं।

पोर्टल पर आंकड़े फरवरी से अपडेट नहीं हो पाए
महिला एवं बाल विकास विभाग के पोर्टल पर 8 महीने से कुपोषण के आंकड़ें अपडेट नहीं हो सके हैं। इसके लिए बार-बार अफसरों ने भोपाल बात की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब जिला कार्यालय ने ब्लॉकवार आंकड़ें जुटाना शुरू किए हैं। फरवरी तक 5 साल से कम उम्र के 23560 बच्चे कुपोषित थे। इनमें से 2178 अति कुपोषित पाए गए थे।

बच्चों तक पहुंचा रहे हैं पैकेट
पोर्टल पर आंकड़ें अभी अपडेट नहीं हुए हैं। ब्लॉकवार जानकारी ले रहे हैं। लॉकडाउनके दौरान सत्तू के पैकेट हमने उपलब्ध कराए। हलुआ, खिचड़ी और लड्‌डू के पैकेट एमपी एग्रो के माध्यम से मिल रहे हैं। इन्हें सभी बच्चों और गर्भवती माताओं को पहुंचा रहे हैं।
अजय चौहान, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग

खबरें और भी हैं...