अप्रैल माह में 60 डिलीवरी केस आए:सीजर एक ही हुआ, क्योंकि दोनों गायनेकोलॉजिस्ट पॉजिटिव थीं

झाबुआ6 महीने पहले
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जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में अप्रैल की पहली सर्जरी सोमवार रात को हुई। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में अप्रैल की पहली सर्जरी सोमवार रात को हुई।
  • जिला अस्पताल के जनरल वार्ड, सर्जिकल वार्ड में भी सिर्फ कोरोना संक्रमण या लक्षण वाले मरीज ही

जिला अस्पताल में प्रसूति वार्ड को छोड़कर बाकी वार्ड में कोरोना संक्रमित या लक्षण वाले मरीज भर्ती हैं। यहां भी डिलीवरी की संख्या अप्रैल में कम हो गई। हर महीने 70 से 80 डिलीवरी होती है, अप्रैल में अब तक 60 प्रसूति हुई। 8 से 10 सीजर होते थे, जो अप्रैल में 26 तारीख तक एक भी नहीं हुआ। सोमवार की रात क्रिटिकल कंडीशन में आई गर्भवती की सर्जरी करना पड़ी। ऐसा होने के पीछे तीन कारण हैं, पहला कोरोना मरीजों के काफी संख्या में भर्ती होने से लोग स्पेशियलिटी अस्पताल जा रहे हैं। दूसरा यहां की दोनों गायनेकोलॉजिस्ट पिछले दिनों कोरोना पॉजिटिव आ गई थीं। तीसरा कारण, सर्जरी के लिए जरूरी स्टाफ भी अभी कोरोना मरीजों के उपचार में लगा है।

यहां के अकेले एनेस्थेटिक फिलहाल 16 आईसीयू बेड के मरीजों को देख रहे हैं। प्रसूति वार्ड में जनवरी से अब तक 319 डिलीवरी हुई। इनमें से 24 सीजर हुईं और 28 को रैफर किया गया। 24 में से सिर्फ एक सर्जरी अप्रैल में की गई। दोनों की जान जा सकती थी : प्रसूति वार्ड की डॉक्टर सोनल रावत ने बताया, पारा क्षेत्र की महिला देर शाम पहुंची थी। बच्चे की स्थिति गर्भ में ठीक नहीं थी। ऐसे में सामान्य डिलीवरी तो नहीं हो सकती थी और न इतना समय था कि वो कहीं बाहर जा सके। फौरन स्टाफ को बुलाया और महिला के आने के दो घंटे में ऑपरेशन शुरू कर दिया। महिला ने स्वस्थ बेटी काे जन्म दिया।

20 ऑक्सीजन बेड बढ़ाना पड़ रहे : जिला अस्पताल में ऑक्सीजन बेड की संख्या कुल 66 है। कोविड आईसीयू वार्ड में 10 और आईसीयू के 16 बेड शामिल हैं। सभी फुल हैं। फीमेल वार्ड में 5 मरीज, जनरल वार्ड में 5, मेल मेडिकल वार्ड में 8 और सर्जिकल वार्ड में 10 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें ऑक्सीजन देना पड़ रही है। जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाय के 20 बेड और बढ़ाना पड़ रहे हैं। अस्पताल में 58 संक्रमित हैं। मेघनगर में प्लांट शुरू होने और इंदौर से लिक्विड ऑक्सीजन मिलने से अब इंदौर और पीथमपुर से सप्लाय लेना जिले में बंद कर दिया गया है। प्रभारी अधिकारी विशा माधवानी ने बताया, 3 से 4 दिन में 2 से 3 हजार लीटर लिक्विड ऑक्सीजन मिल रहा है। अस्पतालों को मरीजों की जरूरत के हिसाल से आक्सीजन दे रहे हैं।

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