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पर्युषण महापर्व के चौथे दिन मुनि रजतचन्द्र विजयजी ने कहा:कल्पसूत्र भाव सुनने से शाश्वत सुख प्राप्त होता है

झाबुआ11 दिन पहले
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श्री पर्युषण महापर्व के चौथे दिन सोमवार सुबह मुनि रजतचंद्र विजयजी व मुनि जीतचंद्र विजयजी ने महान ग्रंथ कल्पसूत्र का वाचन प्रारंभ किया। कल्पसूत्र ग्रंथ को वाजते-गाजते उमेश भावेश मेहता परिवार के निवास स्थान से श्री ऋषभदेव बावन जिनालय लाया गया और तीन प्रदक्षिणा दी गई। इसके बाद ग्रंथ को उमेश भावेश मेहता परिवार द्वारा वोहराया गया। डाॅ. प्रदीप संघवी परिवार ने कल्पसूत्र ग्रंथ को वधाया।

ग्रंथ का प्रथम वासाक्षेप पूजा मनोहर छाजेड़ दूसरी मांगुबेन सकलेचा, तीसरी ओएल जैन, चौथी धर्मचंद्र मेहता, लीलाबेन भंडारी परिवार ने मंत्रोच्चार के साथ किया। ग्रंथ की अष्टप्रकारी पूजा का लाभ यशवंत भंडारी और आरती मांगुबेन सकलेचा परिवार ने लिया। कल्पसूत्र ग्रंथ का वाचन करते हुए मुनिश्री ने कहा यह पवित्र ग्रंथ है जिसको बालावबोध भी कहते हैं। श्रीमद्विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराज द्वारा संकलित है।
इसके समान ग्रंथ नहीं है : पर्युषण पर्व में इसे साधु भगवंत को प्रवचन करना अनिवार्य होता है। मुनिश्री ने वांचन प्रारंभ करते हुए बताया कि इसके समान कोई ग्रंथ नहीं है। जो भी श्रावक अठम तप कर श्रद्धाभाव से कल्पसूत्र को सुनता है। वह अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाता है। उसके जीवन में आने वाली आपदा दुर होती है। कर्म हल्के होते और 8 भव में मोक्ष प्राप्त करता है। मुनिश्री ने कल्पसूत्र का वाचन करते हुए कहा कि महावीर के साधु के लिए 10 आचार बताए हैं। साधु को 5 महाव्रतों का पालन अनिवार्य होता है।

जिसने बड़ी दीक्षा पहले ली तो वह बड़ा साधु कहलाता है। मुनिश्री ने बताया यह ग्रंथ पाप निवारक है, शाश्वत सुख प्रदान करने वाला होता है। सभी सूत्रों में श्रेष्ठ सूत्र होता है। इस ग्रंथ में साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाओं के कर्तव्यों का विस्तृत वर्णन पूज्यश्री ने बताए हैं। कल्पसूत्र के अनुसार प्रत्येक साधु-साध्वी को चैत्य परिपाटी, केश लोच करना, कल्पसूत्र का वाचन करना चाहिए।

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