पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

एक और मशीन मिली:हर दिन 4 की जगह 6 डायलिसिस होंगे, कर्मचारी की संख्या में कटौती

झाबुआ3 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
जिला अस्पताल में प्रधान दो बेड की क्षमता वाली डायलिसिस यूनिट है। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल में प्रधान दो बेड की क्षमता वाली डायलिसिस यूनिट है।

किडनी की बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए जिला अस्पताल में एक और डायलिसिस मशीन आ गई है। ये सिंगल बेड वाली मशीन है, जिसका इंस्टालेशन जल्दी हो जाएगा। ये अच्छी खबर है, लेकिन इसके साथ एक परेशान करने वाली खबर ये भी है कि मशीन बढ़ने के साथ जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट संचालन का स्टाफ अब कम हो जाएगा।

सरकार ने प्रदेश के सभी अस्पतालों में डायलिसिस मशीन संचालन के लिए आउटसोर्सिंग का निर्णय लिया और टेंडर भी कर लिए हैं। एपेक्स नाम की कंपनी जिला अस्पताल में एक टेक्नीशियन और एक सहायक या नर्स देंगे। अभी अस्पताल प्रशासन ने एक टेक्नीशियन रख रखा है और दो स्टाफ नर्स की ड्यूटी है। यानि आने वाले समय में काम डेढ़ गुना होगा और स्टाफ 33 प्रतिशत कम हो जाएगा।

जिला अस्पताल में 25 मई 2016 को डायलिसिस यूनिट की शुरुआत हुई थी। यहां दो बेड वाली यूनिट चल रही है। शुरुआत में कंपनी ने टेक्नीशियन रखा था। बीते दो साल से अस्पताल प्रशासन ही टेक्नीशियन का मानदेय दे रहा है। दो स्टाफ नर्स मदद के लिए हैं। लेकिन अब ये सिस्टम बदलने वाला है। प्रदेश में सभी सरकारी अस्पतालों की डायलिसिस यूनिट में आउटसोर्स से कर्मचारी रखे जाएंगे।

खबर है कि झाबुआ के लिए एक टेक्नीशियन और एक नर्स रहेंगे। जबकि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर के हिसाब से हर यूनिट के लिए कम से कम 7 लोगाें का स्टाफ होना चाहिए। एक नेफ्रोलॉजिस्ट जरूरी है, वो यहां पदस्थ ही नहीं है। इसके बावजूद अब कर्मी कम किए जाएंगे।

हर माह 100 डायलिसिस
इस यूनिट के पहले शहर के मरीजों को डायलिसिस के लिए धार जिले के राजगढ़ या गुजरात के दाहोद सहित दूसरे शहरों में जाना पड़ता था। अब क्रॉनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) के मरीजों को यहीं सुविधा मिलने लगी। हर दिन दो सुबह और दो डायलिसिस शाम को हो रहे हैं। हर महीने लगभग 100 डायलिसिस हाेते हैं। एक और मशीन लगने के बाद ये संख्या 150 तक पहुंच जाएगी।

इतना होना चाहिए स्टाफ

  • नेफ्रोलॉजिस्ट 1: ये किडनी की बीमारियों का विशेषज्ञ डॉक्टर होता है।
  • डायलिसिस डॉक्टर 1: एमबीबीएस डॉक्टर।
  • डायलिसिस नर्स: ट्रेनिंग जरूरी। तीन बेड पर एक नर्स।
  • डायलिसिस अटेंडेंट: ये मरीज के साथ का अटेंडेंट होता है।
  • डायलिसिस टेक्नीशियन: दो साल की ट्रेनिंग जरूरी। तीन बेड पर एक टेक्नीशियन।
  • मेडिकल सोशल वर्कर: ये मरीज की मदद के लिए होना चाहिए।
  • डायटिशियन: डायटिशियन का होना जरूरी नहीं है, अस्पताल चाहे तो रख सकता है।
  • स्वीपर एक।

हमारे हाथ में नहीं
भोपाल से ही टेंडर के माध्यम से आउटसोर्स एजेंसी तय की गई है। ये हमारे हाथ में नहीं है। एक मशीन और मिली है। जैसे अभी तक संचालन हो रहा था, आगे भी नियमित चलता रहेगा।
डॉ. बीएस बघेल, सिविल सर्जन

तीसरी लहर करीब, ऑक्सीजन प्लांट और सीटी स्कैन का पता नहीं
जिला अस्पताल में नई सीटी स्कैन मशीन और ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद अप्रैल में शुरू की गई थी। सरकारी दावा था कि तीसरी लहर के पहले तैयारी कर ली जाएगी। वैज्ञानिकों ने अगस्त या सितंबर तक तीसरी लहर आने की संभावना जताई है। लेकिन जिला अस्पताल में इन दोनों सुविधाओं का काम अप्रैल के बाद से बढ़ नहीं पाया। अब बताया जा रहा है कि सीटी स्कैन मशीन आने में दो-तीन महीने लग सकते हैं। ऐसा हुआ तो ये तीसरी लहर के गुजरने के बाद होगा।

खबरें और भी हैं...