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पानी नहीं:नदी किनारे खेत लेकिन रबी के लिए नहीं मिलता पानी, ऐसे में कम बारिश के बावजूद बोवनी का बढ़ाया लक्ष्य

झाबुआएक महीने पहले
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सेमलिया बड़ा में खेलसिंह पानी कम मिलने से चना बो रहे
  • झाबुआ में नया बैराज बनने से धमोई का पानी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन बैराज में पानी नहीं भरा जा सका

साल 2020 में 2019 के मुकाबले 254 मिलीमीटर बारिश कम हुई। ये आंकड़ें रबी की फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। कम बारिश के बावजूद इस साल कृषि विभाग ने पिछले साल हुई बोवनी से 5 हजार हेक्टेयर ज्यादा का लक्ष्य रखा है। ये संभव भी है, अगर सीजन में किसानों को पर्याप्त पानी मिल जाए। लेकिन जिले में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां खेतों के पास से नदी गुजरने के बावजूद पानी नहीं मिल पाता। गेहूं को 4 पानी की जरूरत होती है और मिलता है 2 से 3 बार। ऐसे में ये लोग चना उगाते हैं।

खरडू बड़ी, खरडू छोटी, सेमलिया और आसपास के कुछ गांवों के किसानों को इस साल पानी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन झाबुआ की पेयजल योजना में देरी होने से ये साल भी चला गया। कारण ये कि झाबुआ की पेयजल योजना का काम लगभग एक साल लेट हो गया। बांध तो बन गया, लेकिन मुआवजा नहीं मिलने से इसे पूरा भरा नहीं जा सका।

उपलब्धि वाटर स्टोरेज और परिस्थिति पर निर्भर

पिछले साल काफी ज्यादा बारिश हुई थी। इस बार उससे कम है। लेकिन लक्ष्य पूरा होना परिस्थितियों पर निर्भर करता है। वाटर स्टोरेज सबसे महत्वपूर्ण होता है। सितंबर तक बारिश होती है, तब पता चलता है कि कुल कितनी बरसात हुई। लेकिन लक्ष्य इसके पहले तय हो जाते हैं।’

-एनएस रावत, डिप्टी डायरेक्टर, कृषि विभाग

पहले समझें जमीनी स्थिति

ये गांव सापण नदी के पास है। ये अनास नदी की सहायक नदी है। अभी नदी में पानी है तो दो बार सिंचाई हो जाएगी। बाद में किसान उस पानी पर निर्भर रहते हैं जो झाबुआ के अनास बैराज के लिए छोड़े गए पानी के बाद रास्ते में ठहरा हुआ रह जाता है। धमोई तालाब से सिंचाई के लिए नहरें बनी हैं, लेकिन ये पारा तक ही आती हैं। 3 किलोमीटर दूर के इन किसानों को फायदा नहीं मिलता।

इसका हल हाे नहीं पा रहा

धमोई से झाबुआ शहर को पेयजल मिलता है। अब 47 करोड़ की नई पेयजल योजना के लिए बामनसेमलिया में 30 करोड़ का नया बड़ा बैराज बन गया है। इसके बाद किसानों को उम्मीद थी कि धमोई का पानी उन्हें मिलेगा। इसकी प्लानिंग भी है, लेकिन झाबुआ बैराज के डूब में आ रहे किसानों को 2 करोड़ 70 लाख रुपए मुआवजा दिया जाता है। फाइल दो साल से अटकी है।

पानी मिलता रहे : किसान

  • खरडू के रणवीरसिंह टांक ने 3 बीघा में गेहूं बोया है। बोले- उम्मीद है फसल का समय पूरा होने तक नदी में पानी रहेगा। हम पानी का टैक्स देने को तैयार हैं, बस हमें पानी मिलता रहे।
  • सेमलिया बड़ा के खेलसिंह डामोर का खेत भी नदी किनारे है, लेकिन उन्होंने गेहूं की बजाय चना बोया है। बोले, दो बार पानी मिलेगा और गेहूं नहीं हो पाएगा। कुआं हमारे यहां नहीं है। बोरिंग में यहां पानी नहीं निकलता।

बारिश का अंतर

साल 2019 1399 मिमी साल 2020 1145 मिमी

रबी बोवनी का गणित ऐसा
फसल 2019 इस बार लक्ष्य

गेहूं 73000 हे. 75000 हे.
चना 15200 हे. 18000 हे.
अन्य 9000 हे. 9000 हे.
कुल 97000 हे. 102000 हे.

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