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काव्य संध्या:पावन पर्व था गणतंत्र दिवस शर्मसार हुआ है देश...

झाबुआ3 महीने पहले
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  • एक शाम देशभक्ति के नाम कार्यक्रम में कवि तरंग ने दिल्ली हिंसा पर सुनाई रचना

अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने आजादी में अपने प्राणों की आहुति देने वालों की याद में एक शाम देशभक्ति के नाम काव्य संध्या रखी। इस दौरान कवियों ने देशभक्ति कविताएं सुनाई। भेरूसिंह चौहान तरंग ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर लाल किले पर हुई हिंसा अपनी काव्य रचना सुनाई।

उन्होंने कहा- पावन पर्व था गणतंत्र दिवस शर्मसार हुआ है देश हमारा सुनाई। शरत शास्त्री ने सैनिकों का सम्मान करते हुए सैनिकों का यदि खून बहेगा देश जरा भी नहीं सहेगा, एक प्रहार हुआ तो खत्म निकट कहानी है की प्रस्तुति दी।

आयोजन सिद्धेश्वर काॅलोनी में आदर्श विद्या मंदिर के हाॅल में हुआ है। आयोजक अभा साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष साहित्यकार कवि भेरूसिंह चौहान तरंग थे। सर्वप्रथम साहित्यकार कवि गणेश उपाध्याय, डॉ. वाहिद फराज एवं एजाज नाजी धारवी ने मां सरस्वती व भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

सरस्वती वंदना के साथ साहित्यकार पीडी रायपुरिया ने राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत गीत की प्रस्तुति दी। विनोद गुप्ता ने गणेश वंदना की प्रस्तुति दी। जयेंद्र वैरागी ने सूरज से कह दो कि वह अपने घर आराम करे कविता सुनाई। गजलकार एजाज नाजी धारवी ने छोड़ देता है वो तो सूरज को और शुआओ को कैद करता है गजल सुनाई तो साहित्यकारों ने ताली बजाकर सराहना की।

हिंदी व उर्दू के हस्ताक्षर डॉ. वाहिद फराज ने अपने अंदाज़ में प्यारा हिंदुस्तान ये अपना प्यारा हिंदुस्तान गीत की प्रस्तुति से देश प्रेम की भावनाओं का संचार किया। पं. गणेश उपाध्याय ने वीर रस की काव्य रचना जब जली आग आजादी की भारत का जन-जन डोल उठा प्रस्तुत की।

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