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अनलॉक मैनेजमेंट का असर:7 दिन पहले अनलॉक 5 जिलों में संक्रमण दर 1% से नीचे वजह- सभी दुकानों को एक साथ छूट नहीं, भीड़ पर सख्ती

झाबुआ24 दिन पहले
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  • खंडवा, बुरहानपुर, झाबुआ, आलीराजपुर व भिंड जिले में संक्रमण दर 5% से कम होने के कारण 24 मई से शर्तों के साथ मिली है राहत

1 जून से प्रदेश के सभी जिले कुछ प्रतिबंधों के साथ अनलॉक हो जाएंगे। इसके साथ ही यह सवाल भी उठने लगा है कि अनलॉक के बाद कोरोना संक्रमण की कैसी स्थिति रहेगी? इस सवाल का उत्तर जानने के लिए दैनिक भास्कर ने उन पांच जिलों की स्थिति का पता लगाया जो सात दिन पहले अनलॉक हुए क्योंकि इन जिलों में संक्रमण दर पांच फीसदी से नीचे थी। ये जिले हैं- खंडवा, बुरहानपुर, झाबुआ, आलीराजपुर व भिंड। इन जिलों में सुकून देने वाली बात यह है कि व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होने के बावजूद पांच दिनों में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा दहाई तक नहीं पहुंचा और संक्रमण दर एक प्रतिशत से नीचे रही।

इन जिलों में पहले ही संक्रमण दर कम थी लेकिन अनलॉक के दौरान भी मास्क-सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने पर दंड वसूलने की कार्रवाई जारी रही। सामूहिक भोज-शादियों व भीड़ पर पाबंदी लगाई गई और अफसरों को एक-एक संक्रमित क्षेत्र गोद दे दिए गए। किसी व्यक्ति की निगेटिव रिपोर्ट आने पर भी उसे क्वारेंटाइन रखा गया।

खंडवा : निगेटिव रिपोर्ट पर भी होम क्वारेंटाइन
24 मई से लॉकडाउन में शर्तों के साथ मोबाइल-चश्मे की दुकानें खोलने की अनुमति मिली। दुकानदारों ने भीड़ इकट्ठा नहीं होने दी, क्योंकि उन्हें कार्रवाई का डर था। किराना की होम डिलीवरी चालू रही। संक्रमण दर घटने के बाद भी सैंपलिंग नहीं रोकी गई।

कांटेक्ट ट्रेसिंग वालों की भी सैंपलिंग हुई। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी 2400 लोगों को होम क्वारेंटाइन रखा ताकि उनमें थोड़ा सा भी संक्रमण हो तो पता चल जाए। लगातार संक्रमित मरीजों से इलाज का फीडबैक लेते रहे। जहां परेशानी हुई, वहां तत्काल टीम पहुंचाई गई।

जिस पंचायत में 3 से ज्यादा संक्रमित मिले, वहां पहले से लागू कोरोना कर्फ्यू में ढील नहीं दी गई। स्थानीय मरीजों को जिला अस्पताल की जगह ब्लॉक स्तर पर ही भर्ती कर ठीक किया गया। सालभर में मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने पर 300 केस दर्ज किए गए। 1.25 करोड़ का जुर्माना वसूला गया। जुर्माने व केस के डर से लोग नियमों का पालन करने लगे।

बुरहानपुर : अफसर-कर्मियों को गोद दिए संक्रमित क्षेत्र
सुबह 6 से दोपहर 4 बजे तक दूध, किराना, फल-सब्जी, खाद-बीज दुकानें खुली। निजी कार्यालय में 25% कर्मचारी जबकि सरकारी में 100% अफसर व 25% कर्मचारी बुलाए। जिन गांवों-वार्डों में 3 से अधिक मरीज थे, उसे रेड जोन व कम मरीज वाले क्षेत्रों को आरेंज जोन में लिया। अफसरों को एक-एक संक्रमित क्षेत्र गोद दिया। महाराष्ट्र सीमा पर सख्ती की। शुक्रवार शाम 4 बजे से फिर 60 घंटे का साप्ताहिक कर्फ्यू लगाया।

झाबुआ : सैलून-सराफा बंद रहे, इसलिए भीड़ नहीं जुटी
जरूरी सेवाओं वाली कृषि, फल-दूध सब्जी, हार्डवेअर की दुकानों को सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक खोलने की छूट मिली, जबकि सैलून-पॉर्लर, जिम व सराफा बाजार बंद रही। शादियों पर 15 जून तक प्रतिबंध लगा दिया गया। ऐसे में बाजार में भीड़ नहीं जुटी।

आदिवासी अंचल में डुंगरे-फलिए दूर-दूर बसे हुए हैं इसलिए सर्दी-जुकाम व बुखार के मरीजों को घर पर ही उपचार उपलब्ध कराया गया। गांवों में 20 हजार से ज्यादा मेडिकल किट बांटी गई। पिकनिक स्पॉट बंद कर दिए गए। बाजार में पुलिस ने सख्ती की।

आलीराजपुर : होम क्वारेंटाइन के बजाय सीसी सेंटर में इलाज
जिले में संक्रमित व संदिग्ध मरीजों का उपचार भी होम क्वारेंटाइन के बजाय कोविड सेंटर में ही हुआ। इससे एक्टिव मरीजों का परिजनों से संपर्क नहीं हो पाया। वहीं दूध-खाद-बीज की दुकानें व ट्रैक्टर गैरेज समयानुसार खुले रहे। शादी की सूचना मिलते ही कार्रवाई व टालने के प्रयास किए गए। गाड़ियों में ओवरलोडिंग पर रोक लगाई। दुर्गम क्षेत्रों के फलिए में एक केस निकलने पर भी पूरे गांव की सैंपलिंग की गई।

भिंड : सामूहिक भोज जैसे कार्यक्रमों पर सख्ती
हार्डवेयर और सर्विस सेक्टर की दुकानों को छूट दी, क्योंकि यहां ज्यादा लोग पहुुंचते हैं। यहां भीड़ न हो इसलिए सख्ती की। शादी के सीजन के कारण किराना, बर्तन, सराफा आदि की दुकानों को प्रतिबंधित रखा। इन दुकानों पर भीड़ अधिक होने की संभावना रहती है। सामूहिक भोज जैसे कार्यक्रम पर सख्ती से रोक जारी रखी। 5 दिनों में 12 लोगों पर सामूहिक भोज आयोजित करने के मामले दर्ज किए।

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