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  • Information About The Accidents Will Have To Be Uploaded On The App, Experts Sitting In The Control Room Will Analyze And Explain The Cause Of The Accident And Ways To Avoid It.

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नई योजना:हादसों की जानकारी एप पर करना होगी अपलोड, कंट्रोल रूम में बैठे विशेषज्ञ विश्लेषण कर हादसे का कारण और इससे बचने के उपाय बताएंगे

झाबुआएक महीने पहले
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हाइवे पर हादसों में होने वाली मौतों की जानकारी अब प्रशासन द्वारा एप पर अपलोड की जाएगी। यह नई योजना 1 अप्रैल से शुरू होने वाली है। जिसे पूरे देशभर में लागू किया जाएगा। आईरेड (इंडियन रोड एक्सीडेंट डाटा) एप पर अपलोड किए गए फोटो, वीडियो सहित अन्य जानकारी का विश्लेषण कर विशेषज्ञ हादसे का कारण और इससे बचने के उपाय बताएंगे। घटना वाली जगह के कोऑर्डिनेट्स एप पर दर्ज होंगे।

जिले में हर साल सड़क हादसों में कई लोगों की मौत होती है। बीते एक महीने में हाइवे पर हुई घटनाओं में 5 से ज्यादा मौत हुई है। देशभर में दुर्घटना में हो रही मौतों की दर कम करने के लिए 1 अप्रैल से एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस परियोजना लागू की जा रही है। इसके तहत हादसा होने के बाद मौके की फोटो और वीडियो के साथ हादसे के कारणों की जानकारी मोबाइल एप आईरेड के माध्यम से अपलोड की जाएगी।

इसके बाद चेन्नई में बैठे विशेषज्ञों द्वारा इसका विश्लेषण कर हादसों में कमी लाने के लिए उपाय बताए जाएंगे। एप को लेकर पुलिस के विवेचना अधिकारी और ट्रैफिक जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। हर थाने और चौकी के पुलिसकर्मियों को इस एप को लेकर प्रशिक्षण देने की योजना है। ताकि वे मौके पर पहुंचकर सभी जरूरी जानकारियां अपलोड कर सकें।

एप पर घटनास्थल की अक्षांश और देशांतर की जानकारी से सटीक लोकेशन सहित दुर्घटनाओं का कारण जैसे शॉर्ट टर्न, ओवर स्पीड, क्राॅसिंग सहित अन्य जानकारियों के साथ मृतकों और घायलों की संख्या अपडेट करेंगे। घटनास्थल के फोटो और वीडियो भी अपलोड किए जाएंगे। एसपी आशुतोष गुप्ता ने बताया कि इससे ब्लैक स्पॉट का पता चल सकेगा। अभी तक एफआईआर में घटनास्थल और कारण दर्ज होते थे। लेकिन एक डेटाबेस नहीं था, जिससे ये पता चल सके कि किसी एक लोकेशन पर घटनाएं हो रही है और एक ही तरह से। ये जानकारी होने पर बचाव के लिए उपाय किए जा सकेंगे।

पुलिस काे हादसे के फोटो खींचने और वीडियो बनाने होंगे
दुर्घटनाओं का डेटाबेस तैयार करना और हादसों की रोकथाम इसका मुख्य उद्देश्य रहेगा। एकत्र किए डेटा का भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान मद्रास के दल द्वारा विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद उनके द्वारा हादसों को कम करने के लिए किए जाने वाले उपाय बताए जाएंगे। आईआरएडी प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए जिन विभागों का चयन किया गया, उनमें सबसे पहले पुलिस विभाग है। इसके लिए दुर्घटना क्षेत्र के संबंधित जांच अधिकारी दुर्घटना स्थल पर जाकर दुर्घटना की जानकारी मोबाइल एप के माध्यम देंगे। फोटो और वीडियो बनाने होंगे। परिवहन विभाग के विशेषज्ञ फोटो और वीडियो देखकर समीक्षा करेंगे कि हादसा किस वजह से हुआ है।

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