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अनदेखी:जंगल में पहाड़ियों के बीच स्थित भौरण हनुमान मंदिर पर सुविधा का अभाव

आम्बुआएक महीने पहले
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  • पहुंच मार्ग नहीं होने से भक्त होते हैं परेशान

आलीराजपुर व उमराली के बीच मुख्य मार्ग से डेढ़ किमी दूर पहाड़ियों में भाैरण हनुमान मंदिर है। जोकि धार्मिक आस्था का केंद्र बनता जा रहा है। लेकिन सुविधाओं के अभाव में भक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

मुख्य सड़क मार्ग से भौरण मंदिर तक जाने के लिए सही रास्ता नहीं होने के कारण भक्तजन को आने-जाने में परेशानी होती है। यदि मुख्य सड़क मार्ग से मंदिर तक सड़क निर्माण हो जाता है तो निश्चित ही इस घने जंगल में स्थापित हनुमानजी का मंदिर एवं सुंदर शिवलिंग के दर्शन करने के लिए भक्तों को आसानी होगी।

ऐसे हुई थी मंदिर की स्थापना

22 फरवरी 1997 को गोपालसिंह जादौन ने सपत्नीक मंदिर की विधिवत स्थापना करवाई। चमत्कारिक बालाजी की प्रतिमा के दर्शन करने धीरे-धीरे भक्तों का आनाजाना शुरू होने लगा। दर्शन करने एवं मन इच्छा की पूर्ति होने से यह भौरण हनुमान मंदिर में भक्तों की संख्या लगातार बढ़ने लगी। इस हनुमान मंदिर के पास में वर्षों पुराना शिवलिंग भी स्थापित है। जहां पर 12 महीने लगातार पहाड़ियों से पानी आता है और गोमुख से शिवलिंग पर अर्पित होता रहता है। सुंदर घने जंगल व पहाड़ियों के मध्य बना मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है।

सतानंद महाराज ने संभाली गादी

इस मंदिर की देखभाल करने वाला नहीं होने से इस जंगल में भय का वातावरण बना रहता था। वर्ष 2013 में इस मंदिर की सेवा करने के लिए गादीपति शतानंद सरस्वती महाराज ने मंदिर के पास में ही घने जंगल में अपनी कुटिया बनाकर सेवा प्रारंभ की। जिनके अथक प्रयास से आज भौरण मंदिर का नाम एवं भक्तों की संख्या मे निरंतर बढ़ रही है।

मान लेने नेता भी आते हैं : बताया जाता है कि इस मंदिर के दर्शन करने व मान लेने के लिए लोगों का आना-जाना लगा रहता है। चुनाव अभियान से पूर्व यहां पर सभी दलों के नेता एवं अपनी विजय होने की मांग लेकर आते हैं। माना जाता है कि बाबा हनुमानजी के दर्शन मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

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