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मौसम की मार:जरूरत 56 हजार की, 25 हजार मैट्रिक टन बंटा फर्टिलाइजर, किसान लगा रहे चक्कर

झाबुआ13 दिन पहले
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कालापीपल सोसायटी पर सुबह से बैठे किसान, एक को भी नहीं मिला यूरिया - Dainik Bhaskar
कालापीपल सोसायटी पर सुबह से बैठे किसान, एक को भी नहीं मिला यूरिया
  • बोवनी एक महीना देर से हुई, अब उर्वरक के लिए कतार, किसान बोले- 8 दिन में नहीं मिला तो काम का नहीं

बारिश में देर हुई तो बोवनी में भी। किसान आमतौर पर जून के आखिर तक बोवनी पूरी कर देते हैं, लेकिन ये अब हो रही है। अभी भी कुछ इलाकों में बाकी है। पहले बोवनी और बीज के लिए परेशान हुए किसान अब उर्वरक के लिए भटक रहे हैं। सोसायटियों पर लंबी कतार में लगने के बावजूद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

सरकारी रिकाॅर्ड के मुताबिक अभी जरूरत से आधा उर्वरक भी किसानों को नहीं बांटा गया। जरूरत लगभग 56 हजार मैट्रिक टन की है और इसके बदले 25 हजार मैट्रिक टन किसानों तक पहुंचा। कई किसानों को अभी तक उर्वरक नहीं मिला। हर दिन सोसायटी के चक्कर लगा रहे हैं और खाली हाथ लौट रहे हैं। किसान बताते हैं, 8 दिन और यूरिया नहीं मिला तो कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

जिले में 1 लाख 89 हजार हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य रखा गया था। इसके बदले अभी तक 98.8 प्रतिशत इलाके में बोवनी हो सकी है। बारिश की बात की जाए तो पिछले साल से लगभग आधी बरसात हुई है। मक्का, सोयाबीन की बोवनी खरीफ में सबसे ज्यादा होती है। इस बार मूंगफली और दलहन की बोवनी उम्मीद से कम हुई।

मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित के मैनेजर बबन मौर्य के अनुसार हर सप्ताह 30 से 40 टन की डिमांड है। इसके बदले 15 से 20 टन आता है। मेघनगर रैक पाइंट पर रैक लगने पर कमी दूर हो जाएगी। दो-तीन दिन में संभावना है। आठ-दस दिन में दूसरी रैक भी आएगी। इसके बाद समस्या नहीं होगी।

पहले जानिए अफसरों का दावा

विपणन सहकारी संघ के मैनेजर बबन मौर्य ये तो मानते हैं कि उर्वरक डिमांड से आधे मिल रहे हैं, लेकिन कमी की बात काे नकारते हैं। कहते हैं, जरूरत के हिसाब से मिल रहा है। उप संचालक कृषि विभाग एनएस रावत उर्वरक की कमी की बात को सिरे से खारिज करते हैं। वो कहते हैं, जरूरत 56175 मैट्रिक टन की है, 34936 मैट्रिक टन जिले में आ चुका है और 25329 बंट चुका है। 9607 एमटी गोदामों में रखा है। कमी कहीं नहीं है। समय पर आ रहा है और बंट रहा है।

अब किसानों की आपबीती सुनिए

गोला छोटी के किसान वेलजी खूमसिंह डामोर ने खेत में कपास और मक्का की बोवनी की है। उन्हें 5 बोरी उर्वरक की जरूरत है। सुबह से विपणन संघ के गोदाम पहुंच गए, लेकिन दोपहर 1 बजे तक उर्वरक की खेप नहीं पहुंची तो लौट गए। अब गुरुवार को आएंगे।

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