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समर्थन मूल्य:15 अप्रैल से जिले में शुरू हाेगी समर्थन मूल्य पर खरीदी

झाबुआ8 महीने पहले
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  • कलेक्टर ने अधिकारियाें के साथ बैठककर दिए निर्देश, जिले में 106 खरीदी केंद्र बनाए
  • साेशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने गेहूं खरीदी केंद्राें पर लगेगी फ्लैक्सिबल स्क्रू कन्वेयर मशीन

जिले में समर्थन मूल्य पर हाेने वाली खरीदी 15 अप्रैल से प्रारंभ हाेगी। 106 केंद्राें पर गेहूं, चना अाैर मसूर की खरीदी की जाएगी। साथ ही 60 केंद्राें की खरीदी 46 वेयरहाउस के माध्यम से की जाएगी ताकि वहां वहां से गेहूं भंडारण हाे सके और परिवहन का शासन का व्यय भी बच जाए। इस संबंध में शनिवार काे कलेक्टर श्रीकांत बनाेठ ने अधिकारियाें की बैठक लेकर निर्देश दिए। साेशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने गेहूं खरीदी केंद्राें पर फ्लेक्सिबल स्क्रू कन्वेयर मशीन लगाई जाएगी। समर्थन मूल्य पर खरीदी 1 अप्रैल से हाेने वाली थी, जिसे काेराेना संक्रमण के चलते लागू किए गए लाॅकडाउन के कारण स्थगित कर दिया था। 
जिला खाद्य अधिकारी आरसी मीणा के अनुसार जिलेभर में 10 उपकेंद्र मिलाकर 97 केंद्राें पर खरीदी हाेनी है। 46 हजार से अधिक किसानाें ने पंजीयन कराया है। मीणा ने बताया कि गत वर्ष 36600 मेट्रिक टन गेहूं की खरीद की थी। क्योंकि कम रकबे में गेहूं लगाया था। इस बार गेहूं का जिले में रकबा 2 लाख 60 हजार हेक्टेयर है। इस लिहाज से ढाई लाख मेट्रिक टन गेहूं की खरीदी हाेने का अनुमान है। हमारे पास भंडारण और बारदान की भी पर्याप्त उपलब्धता है। साथ ही किसानाें के खाते में दूसरे या तीसरे दिन जीप पाेर्टल से पैसा भी डाल दिया जाएगा। 
एसएमएस वाले किसानाें से ही हाेगी खरीदी : खाद्य अधिकारी मीना के अनुसार जिन किसानाें काे शासन से एसएमएस प्राप्त हाेंगे उन्हीं की उपज खरीदी जाएगी। जिनके पास एसएमएस नहीं हाेंगे उनकी उपज नहीं ली जाएगी। 

इस उपज के लिए इतने पंजीयन : गेहूं-4091, चना-6200, मसूर-150

मशीन लगने से मजदूर कम लगेंगे, किसानाें काे उपज बेचने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा 

किसानाें में साेशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए खरीदी केंद्राें पर फ्लेक्सिबल स्क्रू कन्वेयर मशीन लगाई जाएगी। यह मशीन माेटर सेक्शन पाइप के जरिए स्टाेरेज टैंक के गेहूं काे तेजी से बाेरे में भर देती है। मशीन लगने से मजदूर कम लगेंगे। किसानाें काे इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। शनिवार काे कलेक्टर श्रीकांत बनाेठ ने मशीन का डेमाे देखा। उन्हाेंने हरदा जिले का उदाहरण देते हुए कहा वहां सारा काम मशीनाें से हाेता है। इसीलिए उन्हाेंने यहां भी मशीन लगाने का निर्णय लिया। एक घंटे में करीब पांच टन तक अनाज संग्रहण व थैले में भरा जा सकता है। मशीन काे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। अनाज शेड के अंदर लाकर तुलाई की जा सकती है। यदि खरीदी केंद्र साल भर में तीन हजार मैट्रिक टन अनाज की खरीदी करता है तो लगभग तीन लाख रुपयों की बचत संभावित है।

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