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पूजा-अर्चना:राजवाड़ा में स्थापित मां नागणेचा के पहली बार आप भी कीजिए दर्शन

झाबुआएक महीने पहले
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  • 423 साल पहले राठौर वंश के पहले राजा केशवदास ने की थी स्थापना
  • राजपरिवार का निजी मंदिर है, यहां कृष्ण भगवान के कई स्वरूप भी विराजित

ये राजवाड़े के अंदर स्थित मां नागणेचा का मंदिर है। मंदिर की स्थापना झाबुआ के राठौर राजवंश के पहले राजा केशवदास ने 1597 ईसवी में की थी। माता के चरणों में उनकी खड़ग भी रखी है। जोधपुर राजवंश से संबंध रखने वाले राजा केशवदास ने झाबुआ पर विजय पाने के बाद सबसे पहले राठौरों की कुलदेवी के मंदिर की स्थापना यहां की थी। अभी राजपरिवार की 15वीं पीढ़ी के राजा नरेंद्रसिंह राजगद्दी पर हैं। राजवाड़ा का अलग-अलग समय पर अलग-अलग राजाओं ने विस्तार किया।

राजा गोपालसिंह के समय अस्तित्व में आया राजवाड़ा अब भी उसी स्वरूप में है। मंदिर में कृष्ण भगवान भी कई स्वरूप में विराजित हैं। राजा नरेंद्रसिंह के अनुसार रानियां इनकी आराधना और पूजा-अर्चना किया करती थी। मंदिर को राजपरिवार ने पुराने स्वरूप में रखने का प्रयास किया है।

ये एक निजी मंदिर है और राजपरिवार ही यहां की व्यवस्था संभालता है। सभी पर्व पर यहां विशेष पूजा होती है। चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में बड़ी पूजा की जाती है। शप्तचंडी का पाठ किया जाता है। वैसे यहां हर दिन सुबह-शाम पूजा करने और दीप जलाने के लिए एक पंडित भी है। दैनिक भास्कर के आग्रह पर राजपरिवार ने फोटो खींचने की अनुमति दी, ताकि हमारे माध्यम से नवमीं पर आप लोग भी इस प्राचीन प्रतिमा के दर्शन कर सकें।

भव्य रूप से मनता था दशहरा, जामली से आता था हाथी

यहां राठौर राजवंश और झाबुआ राजवंश की वंशावली भी मिलती है। जोधपुर की स्थापना करने वाले राव जोधा के पुत्र वरसिंह के वंशजों ने झाबुआ पर राज किया। स्टेटकाल में दशहरा भव्य तौर पर मनाया जाता था। झाबुआ स्टेट के सभी 16 उमराव (ठिकानेदार) घोड़े लेकर यहां आते थे। सभी उमराव गोवर्धननाथजी की हवेली पर दर्शन कर रावण दहन के लिए जाते थे। लौटते समय कालिका माता मंदिर पर दर्शन कर राजवाड़ा आते थे। दशहरे के अगले दिन जुलूस निकलता था।

आज मनेगा शहर में दशहरा

शहर में रावण दहन रविवार शाम नगर पालिका परिसर में होगा। 11 फीट का रावण का पुतला दहन किया जाएगा। इसमें कम संख्या में चुनिंदा अतिथि शामिल होंगे। इस बार नवमी और दशहरा एक ही दिन होने से असमंजस था। जानकारों के अनुसार शनिवार से नवमीं शुरू हो गई जो रविवार सुबह तक रहेगी। रविवार सुबह से सोमवार सुबह 9 बजे तक दशमी रहेगी। ऐसे में रावण दहन दशमी के समय के दौरान किया जाएगा।

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